
नई दिल्ली: जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अचानक स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। अब देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के लिए चुनाव होना बाकी है। इस चुनाव में दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट करेंगे। इसलिए संसद में दलों की संख्या (नंबर गेम) पर सबकी नज़र टिकी हुई है।
लोकसभा की कुल सीटें 543 हैं, लेकिन बशीरहाट सीट फिलहाल खाली है, इसलिए प्रभावी संख्या 542 है। इनमें से भाजपा और उसके सहयोगी यानी एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जो बहुमत से बहुत ऊपर है। राज्यसभा की कुल सीटें 245 हैं, लेकिन इस समय 5 सीटें खाली हैं (4 जम्मू-कश्मीर से और 1 पंजाब से)। इस वजह से प्रभावी संख्या 240 हो जाती है। एनडीए के पास राज्यसभा में 129 सांसद हैं।
लोकसभा और राज्यसभा दोनों में मिलाकर प्रभावी सदस्य संख्या 786 है। जीत के लिए किसी उम्मीदवार को 394 वोट चाहिए। एनडीए के पास कुल 422 वोट हैं, जो बहुमत से बहुत ज्यादा है। इसका मतलब है कि एनडीए के उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, यदि सभी सदस्य वोट डालते हैं।
अनुच्छेद 68 के मुताबिक उपराष्ट्रपति पद खाली होने पर जल्द से जल्द चुनाव होना चाहिए। अनुच्छेद 66(1) में बताया गया है कि चुनाव एक विशेष मतदान प्रणाली से होता है, जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोटिंग सिस्टम (STV) कहा जाता है।
इस प्रणाली में मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को प्राथमिकता (रैंकिंग) देते हैं। सबसे पहले सभी मत पहली पसंद के आधार पर गिने जाते हैं। अगर किसी उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वोट मिल जाएं, तो वह विजेता घोषित हो जाता है। अगर ऐसा न हो, तो सबसे कम वोट पाने वाला उम्मीदवार चुनाव से बाहर हो जाता है। उसके वोटों को उसकी मतदाता की दूसरी पसंद के अनुसार अगले उम्मीदवार को दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार 50%+1 वोट नहीं पाता।
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