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कांग्रेस उम्मीदवार Bharat Bhushan Ashu की मुश्किलें बढ़ीं, Vigilance Bureau ने भेजा समन

लुधियाना: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है, जहां लुधियाना उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व कैबिनेट मंत्री भरत भूषण आशू को विजिलेंस ब्यूरो ने तलब किया है। विजिलेंस की यह कार्रवाई 2,400 करोड़ रुपये के एक बड़े भूमि घोटाले से जुड़ी है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

लुधियाना के सराभा नगर में स्थित एक स्कूल की जमीन को लेकर चल रही जांच में यह खुलासा हुआ है कि जिस जमीन को शिक्षा के उद्देश्य से रियायती दर पर आवंटित किया गया था, वहां व्यवसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। इस जमीन पर प्लेवे स्कूल और अन्य निजी व्यवसाय संचालित हो रहे हैं, जिनसे कथित तौर पर भारी किराया वसूला जा रहा है। लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (LIT) के अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर 8 जनवरी 2025 को दर्ज एफआईआर में IPC की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात शामिल हैं।

विजिलेंस ब्यूरो की लुधियाना इकाई ने भरत भूषण आशू को शुक्रवार, 6 जून को सुबह 10 बजे पेश होने का समन भेजा है। यह समन डीएसपी विनोद कुमार द्वारा 4 जून को जारी किया गया था।

-पहले भी घोटालों में आ चुका है नाम

यह पहला मौका नहीं है जब भरत भूषण आशू भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हों। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए 2022 में वे 2,000 करोड़ रुपये के खाद्यान्न परिवहन घोटाले में फंसे थे। आरोपों के अनुसार, उन्होंने फर्जी वाहन पंजीकरण वाले ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया और सरकारी कोष का दुरुपयोग किया। इस मामले में उन्हें अगस्त 2022 में गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि दिसंबर 2024 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज दोनों एफआईआर खारिज कर दी थीं।

-चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्मी

19 जून को होने वाले उपचुनाव में आशू कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। ऐसे में विजिलेंस का यह समन उनके चुनावी अभियान पर प्रभाव डाल सकता है। विपक्ष पहले ही भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है, और यह ताजा घटनाक्रम पार्टी के लिए एक और राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि आशू विजिलेंस की जांच में क्या रुख अपनाते हैं और यह मामला चुनावी समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है। पंजाब की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे एक बार फिर केंद्र में हैं।

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