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संदेशखाली में महिलाओं के विरोध की लहर अब पूरे बंगाल में फैलेगी : PM Modi

कोलकाताः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में कहा कि यौन उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही संदेशखाली की महिलाओं की हालिया जागृति की लहर पूरे राज्य में फैल जाएगी। प्रधानमंत्री ने भाजपा की राज्य इकाई द्वारा महिला सशक्तिकरण पर आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, कि ‘सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से महिला उत्पीड़न की शिकायतों को नजरअंदाज कर रही थी। संदेशखाली में जो कुछ हुआ उससे हर कोई शर्मदिां है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

‘‘अब वे एक के बाद एक अदालत जाकर आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सभी अदालतों में खारिज कर दिया गया है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल को आरोपी तृणमूल कांग्रेस नेता और उनके सहयोगियों पर भरोसा है, लेकिन संदेशखाली की महिलाओं पर नहीं। उन्होंने कहा, कि ‘बंगाल मां शारदा, रानी रशमोनी, सरला देबी, मातंगिनी हाजरा और प्रीतिलता वादेदार की भूमि है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ सरकार महिलाओं के प्रति न्यूनतम सम्मान भी नहीं दिखाती है। याद रखें कि महिलाओं के खिलाफ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के मामले में मौत की सजा तक का प्रावधान है।

‘‘केंद्र सरकार ने एक हेल्पलाइन शुरू की है जहां संकट में फंसी महिलाएं कॉल कर सकती हैं और अपनी शिकायतें दर्ज करा सकती हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार ने उस प्रणाली को संचालित करने की अनुमति नहीं दी है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि संदेशखाली की महिलाओं ने उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ एक सहज विरोध शुरू करके रास्ता दिखाया है। प्रधानमंत्री ने कहा, कि ‘संदेशखाली विरोध की लहर अब राज्य के हर कोने में फैल जाएगी। तुष्टिकरण की राजनीति और व्यापक भ्रष्टाचार दो स्तंभ हैं जिन पर तृणमूल कांग्रेस खड़ी है।’’

उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न केंद्रीय परियोजनाओं को लागू नहीं करने का भी आरोप लगाया।उन्होंने कहा, कि ‘केंद्र की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना पश्चिम बंगाल में लागू नहीं की गई है। उज्‍जवला गैस कनेक्शन योजना के लिए लगभग 14 लाख आवेदन पश्चिम बंगाल सरकार के पास लंबित हैं। वास्तव में इंडिया ब्लॉक भागीदारों द्वारा संचालित सभी राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों में महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्रीय परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधाएं पैदा कर रही हैं।’’

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