Last Updated: September 23, 2026

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Parliament Session: ‘वंदे मातरम् कहते-कहते लोग फांसी पर झूल गए’, लोकसभा में बोले पीएम मोदी

December 8, 2025

Parliament Session: ‘वंदे मातरम् कहते-कहते लोग फांसी पर झूल गए’, लोकसभा में बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली: संसद में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर एक विशेष चर्चा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में भाषण दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् वह मंत्र है जिसने आज़ादी की लड़ाई में देशवासियों को हिम्मत, उत्साह और बलिदान की प्रेरणा दी। पीएम मोदी ने यह भी याद दिलाया कि “वंदे मातरम् कहते-कहते लोग फांसी पर चढ़ गए थे।”

वंदे मातरम् के 150 साल- गौरव का क्षण

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम इस ऐतिहासिक मौके के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वंदे मातरम् के 50 साल पूरे हुए, तब देश ब्रिटिश शासन की गुलामी में था। जब इसके 100 साल पूरे हुए, तब देश आपातकाल की कठिनाइयों का सामना कर रहा था। और आज जब 150 साल पूरे हो रहे हैं, भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

वंदे मातरम् की ऐतिहासिक कहानी

पीएम मोदी ने 20 मई 1906 का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि बारीसाल (अब बांग्लादेश में) में वंदे मातरम् का एक बड़ा जुलूस निकाला गया था, जिसमें 10,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे, हिंदू, मुस्लिम और सभी समुदायों के लोग सभी ने हाथ में वंदे मातरम् के झंडे लेकर मार्च किया था।

वंदे मातरम् गाने पर अंग्रेजों ने लगाया था जुर्माना

पीएम मोदी ने बताया कि अंग्रेज इस गीत से डरने लगे थे क्योंकि यह लोगों को एकजुट कर रहा था। रंगपुर के एक स्कूल में जब बच्चों ने वंदे मातरम् गाया, तो अंग्रेज सरकार ने 200 बच्चों पर 5-5 रुपए का जुर्माना लगा दिया, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने यह गीत गाया था। बाद में कई स्कूलों में वंदे मातरम् गाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई।

 

बंगाल को लैब के तौर पर इस्तेमाल किया

पीएम मोदी ने कहा,  “यही वह समय था जब अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई। उन्होंने बंगाल को अपनी लैब के तौर पर इस्तेमाल किया। उन्हें भी पता था कि बंगाल की बौद्धिक क्षमता देश को दिशा, ताकत और प्रेरणा देती है। उन्हें पता था कि बंगाल की क्षमताएं देश का केंद्र बिंदु हैं। इसीलिए उन्होंने बंगाल को बांटा। उनका मानना ​​था कि अगर बंगाल बंटा, तो देश भी बंट जाएगा। जब उन्होंने 1905 में बंगाल को बांटा, तो वंदे मातरम चट्टान की तरह खड़ा था।”

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