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शेयर बाजार में हलचल ला सकते है ये 5 फैक्टर्स, RBI मीटिंग और US-ईरान तनाव पर टिकी नजर

Stock Market Updates

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नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह निवेशकों को काफी उतार-चढ़ाव दिखाया। लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए प्रमुख सूचकांक इस बात का संकेत हैं कि बाजार फिलहाल दबाव में है। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाला हफ्ता बेहद अहम साबित हो सकता है, जहां पांच बड़े कारक बाजार की चाल तय करेंगे।

1. Reserve Bank of India की MPC बैठक पर नजर

नए वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक 6 से 8 अप्रैल तक आयोजित होगी। बाजार को उम्मीद है कि महंगाई और वैश्विक दबाव के बीच आरबीआई ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख अपना सकता है। 8 अप्रैल को गवर्नर के ऐलान के बाद बाजार में तेज हलचल देखने को मिल सकती है।

2. Donald Trump की चेतावनी और बढ़ता पश्चिम एशिया संकट

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। हालिया घटनाओं के बाद ट्रंप की सख्त चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका सीधा असर निवेशकों के भरोसे और शेयर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

3. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के चलते तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति महंगाई और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देगा।

4. रुपये में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप

भारतीय रुपया हाल ही में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। इस हफ्ते भी करेंसी मार्केट में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में Reserve Bank of India के संभावित कदम अहम होंगे।

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5. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

मार्च महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से भारी निकासी की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो बाजार में तेजी की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है।

कुल मिलाकर, यह हफ्ता भारतीय शेयर बाजार के लिए निर्णायक हो सकता है। घरेलू नीतिगत फैसलों से लेकर वैश्विक भू-राजनीतिक हालात तक, हर मोर्चे पर अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश रणनीति बनाने की जरूरत है, क्योंकि छोटे संकेत भी बाजार की दिशा को तेजी से बदल सकते हैं।

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