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अभिषेक बनर्जी का हमला, ‘न्यू इंडिया में हर चीज बिकाऊ, दुख भी’

Abhishek Banerjee Slams New India

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लोकसभा में जीएसटी को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। सदन में हुई तीखी चर्चा के बाद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबा पोस्ट लिखकर वित्त मंत्री के आरोपों का जवाब दिया।

अभिषेक ने लिखा कि उन्होंने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत रखी है। उन्होंने वित्त मंत्री का भाषण सुनने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि काश वे मनरेगा, पीएम आवास योजना, पीएम ग्राम सड़क योजना और जल जीवन मिशन के बकाया फंड को लेकर बंगाल की मांगों को भी उतनी गंभीरता से सुनतीं।

अपने पोस्ट में उन्होंने दूध, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुओं पर जीएसटी दरों का जिक्र किया। उनका कहना था कि ताजा दूध भले ही जीएसटी मुक्त हो, लेकिन पाउडर दूध पर 5 प्रतिशत टैक्स लगता है। शिक्षा सेवाएं भले मुक्त हों, पर कॉपी, ग्राफ बुक, क्रेयॉन जैसे सामान पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। स्वास्थ्य सेवाएं टैक्स फ्री होने के बावजूद ऑक्सीजन सिलेंडर, इंसुलिन और एनेस्थीसिया पर जीएसटी लागू है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा, “न्यू इंडिया में दुख पर भी कीमत का टैग है।”

अभिषेक बनर्जी ने बेबी फूड, नैपकिन, स्टेशनरी, ब्रॉडबैंड सेवा और दवाओं पर लागू जीएसटी दरों का भी जिक्र किया। साथ ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की कर नीति पर सवाल उठाए।

वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से दूध पर कोई टैक्स नहीं है। प्री-स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा सेवाएं और मान्यता प्राप्त डिग्री कोर्स जीएसटी मुक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किताबों, कॉपियों, पेंसिल, शार्पनर और मैप पर शून्य जीएसटी है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उन्होंने कहा कि इलाज, जांच और देखभाल जैसी सेवाएं शुरू से ही जीएसटी मुक्त हैं। सितंबर 2025 में किए गए ‘नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म’ के तहत व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा योजनाओं पर भी जीएसटी शून्य कर दिया गया है। अंतिम संस्कार सेवाओं पर भी कभी टैक्स नहीं लगाया गया।

बहस के दौरान वित्त मंत्री ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर तंज कसते हुए ‘सिंडिकेट राज’ का जिक्र भी किया।

इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावों और जवाबों ने जीएसटी की दरों और उसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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