आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के समुद्री प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, समुद्री आजीविका और नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह बात गुरुवार को विशेषज्ञों ने कही।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में “एआई फॉर ओशन्स ऑफ टुमॉरो: डेटा, मॉडल्स एंड गवर्नेंस” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में महासागरों से जुड़े क्षेत्रों में एआई की बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई।
मौसम विभाग के महानिदेशक एम. महपात्रा ने अपने मुख्य भाषण में जलवायु नियंत्रण, आपदा जोखिम में कमी, खाद्य सुरक्षा और आजीविका में महासागरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महासागर अवलोकन, चक्रवात पूर्वानुमान, समुद्री डेटा प्रणालियों और प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं में भारत की क्षमताएं लगातार मजबूत हुई हैं, जिससे विपरीत मौसम के दौरान जानमाल के नुकसान में कमी आई है।
उन्होंने महासागरों के बढ़ते तापमान, अम्लीकरण और समुद्र स्तर में वृद्धि जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक भौतिक मॉडलों के साथ डेटा-आधारित और एआई-सक्षम मॉडल अब बेहद जरूरी हो गए हैं।
इस सत्र को संबोधित करते हुए नॉर्वे की भारत में राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने महासागरों और नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत-नॉर्वे सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खुले, भरोसेमंद और इंटरऑपरेबल डिजिटल ढांचे पर आधारित एआई तकनीक मत्स्य प्रबंधन, जहाजरानी दक्षता, बंदरगाह संचालन और तटीय सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।
स्टेनर ने यह भी कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका उसे खुले डेटा और साझा मानकों पर आधारित वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा विकसित करने में सक्षम बनाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लाभ मिलेगा।
पैनल चर्चा में यह निष्कर्ष सामने आया कि खुले डेटा, एआई आधारित विश्लेषण और मजबूत शासन ढांचे को जोड़कर भारत वैश्विक दक्षिण के लिए समुद्री डिजिटल अवसंरचना का नेतृत्व कर सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि समुद्री आजीविका को बढ़ावा देने, परिचालन लागत घटाने और समय पर डेटा आधारित निर्णय लेने के लिए एआई भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

