
नई दिल्ली: स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के व्यापक उपयोग की राह में कच्चे माल की उपलब्धता और ऊर्जा भंडारण की जरूरतें दो बड़ी बाधाओं के रूप में उभरी हैं। भारत वैश्विक तापमान में वृद्धि को कम करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है। इसमें ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, हरित ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना और ऊर्जा दक्षता में सुधार शामिल है। ये रणनीतियां देश के विकास और स्थिरता उद्देश्यों के अनुरूप हैं और 2030 एनडीसी (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित) लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नीतियों के अनुसार कदम उठाया जा रहा है।
समीक्षा में कहा कि सरकार परमाणु, सौर, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ऊर्जा बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, गैर-जीवाश्म यानी हरित ईंधन के मामले में प्रगति के बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं। समीक्षा में कहा कि यह चुनौती केवल महत्वपूर्ण खनिजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके खनन और प्रसंस्करण के लिए आवश्यक ऊर्जा पर भी इसके निहितार्थ हैं। समीक्षा के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा की गति बनाए रखने के लिए उच्च पूंजीगत लागत, भूमि अधिग्रहण में देरी और बिजली पारेषण सुविधाओं की उपलब्धता जैसी समस्याओं को सुलझाना होगा।
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