नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बैंकिंग प्रणाली को तेज़ और तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से चेक से जुड़ी प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। जहां पहले चेक क्लियरेंस में 1 से 2 कार्यदिवस लगते थे, वहीं अब यह प्रक्रिया अक्टूबर 2025 से एक ही दिन में और जनवरी 2026 से केवल तीन घंटे में पूरी हो जाएगी।
मौजूदा प्रक्रिया: देरी बनी बड़ी समस्या
वर्तमान में देशभर के बैंक Cheque Truncation System (CTS) के तहत चेक को बैच मोड में प्रोसेस करते हैं। इसका मतलब है कि चेक जमा करने के बाद आमतौर पर अगले दिन या दो दिन के भीतर ही वह पास या अस्वीकृत होता है। इस विलंब के कारण कई बार लाभार्थियों को भुगतान में देरी और असुविधा का सामना करना पड़ता है।
नया नियम: 3 घंटे में तय होगा चेक का भविष्य
3 जनवरी 2026 से लागू होने जा रहे नए नियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति चेक सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच जमा करता है, तो अधिकतम दोपहर 3 बजे तक यह स्पष्ट करना अनिवार्य होगा कि चेक पास हुआ या अस्वीकृत। यदि निर्धारित समय सीमा में बैंक जवाब नहीं देता, तो वह चेक स्वतः पास मान लिया जाएगा और उसका निपटान कर दिया जाएगा।
लाभार्थी को तुरंत भुगतान
नई व्यवस्था के तहत जैसे ही चेक क्लियर होता है, एक घंटे के भीतर राशि लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे ग्राहकों को न केवल तेज़ सेवा मिलेगी बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
चेक की अब भी बनी हुई है अहमियत
भले ही UPI, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट्स जैसे माध्यमों की लोकप्रियता बढ़ी हो, लेकिन चेक अब भी बड़ी राशि के लेन-देन के लिए पसंद किया जाता है। खासतौर पर कॉरपोरेट जगत, सरकारी संस्थाएं, वेंडर भुगतान, पेंशन वितरण और ग्रामीण क्षेत्रों में चेक का उपयोग प्रमुखता से होता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी यह एक भरोसेमंद तरीका माना जाता है।
चेक के फायदे और सीमाएं
फायदे:
नकद ले जाने का जोखिम नहीं
भविष्य के भुगतान के लिए पोस्ट-डेटेड चेक
सभी लेन-देन का रिकॉर्ड
मेष: दिन शुभ रहेगा...