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प्याज किसानों को सरकार की बड़ी राहत: गृह मंत्री की बैठक के बाद हुआ ये बड़ा ऐलान

Onion Farmers 

Onion Farmers 

मुंबई: महाराष्ट्र के प्याज किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लगातार गिरती कीमतों और भारी नुकसान से परेशान किसानों के समर्थन में अब केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई अहम बैठक के बाद फैसला लिया गया है कि अब NAFED और NCCF सीधे किसानों से प्याज की खरीद करेंगी।

महाराष्ट्र में औने-पौने दामों पर बिक रहा था प्याज

महाराष्ट्र के नासिक, संभाजीनगर, बीड और पुणे जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में किसानों को हाल के दिनों में बेहद कम कीमत मिल रही थी। कई किसानों का कहना है कि जहां प्याज की उत्पादन लागत लगभग 20 रुपये प्रति किलो आती है, वहीं मंडियों में उन्हें 1 रुपये प्रति किलो से भी कम दाम मिल रहे थे। कुछ मामलों में सभी कटौतियों के बाद किसानों के हाथ केवल 50 पैसे प्रति किलो तक पहुंचे।

इस स्थिति से नाराज किसानों ने कई जगह प्रदर्शन भी किए और सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग उठाई।

दिल्ली में हुई हाई लेवल बैठक

किसानों की समस्याओं को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक की। इस दौरान प्याज और गन्ना किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में न्यूनतम मूल्य, इथेनॉल आवंटन और सरकारी खरीद व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।

व्यापारियों के बजाय किसानों से होगी सीधी खरीद

बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब NAFED और NCCF व्यापारियों के बजाय सीधे किसानों से प्याज खरीदेंगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।

इसके अलावा सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि प्याज के निर्यात पर फिलहाल कोई अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी फायदा मिल सके।

10 लाख टन तक खरीद की तैयारी

सरकार अब पहले तय 2 लाख टन की तुलना में 10 लाख टन तक प्याज खरीदने पर विचार कर रही है। वहीं प्याज के बीजों के बड़े पैमाने पर निर्यात को रोकने के लिए भारी निर्यात शुल्क लगाने की मांग को भी स्वीकार कर लिया गया है।

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किसानों को राहत की उम्मीद

केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र सहित देश के अन्य प्याज उत्पादक राज्यों के किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। किसानों का मानना है कि यदि सरकारी एजेंसियां सीधे खरीद करती हैं, तो उन्हें उचित दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और बाजार में कीमतों का संतुलन भी बना रहेगा।

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