Share Market Update: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा। कारोबार की शुरुआत में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूटकर 76,963 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई का निफ्टी भी 167 अंकों की गिरावट के साथ 24,039 के करीब कारोबार करता नजर आया।
मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में हालात बिगड़ने की आशंका के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।

ट्रेंट लिमिटेड के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट
आज के कारोबार में सबसे अधिक दबाव ट्रेंट लिमिटेड के शेयरों पर देखने को मिला। कंपनी के पहली तिमाही के अपेक्षा से कमजोर कारोबारी नतीजों के बाद निवेशकों ने जोरदार बिकवाली की, जिससे शेयर 12 फीसदी से अधिक टूट गया। इसके चलते रिटेल सेक्टर के अन्य शेयरों पर भी दबाव बना रहा।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई शेयर बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। जापान का निक्केई 225 गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स में मामूली मजबूती रही। दक्षिण कोरिया के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स भी सीमित दायरे में कारोबार करते नजर आए। वैश्विक तनाव और बढ़ती तेल कीमतों ने पूरे एशियाई बाजारों की धारणा को प्रभावित किया।
वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी दबाव में
अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखने को मिली। डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक-100 फ्यूचर्स सभी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे, लेकिन ताजा भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी तेजी दर्ज करते हुए 74 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। घरेलू वायदा बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला।
डॉलर मजबूत, रुपये पर दबाव
वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर में मजबूती बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है, जो विदेशी निवेश प्रवाह और आयात लागत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और लंबी अवधि की निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।