नई दिल्ली: भारत में छोटे प्राइवेट एयरपोर्ट का पूंजीगत व्यय पिछले 3 वित्त वर्षो की तुलना में वित्त वर्ष 2026-2028 में औसतन 50-60 प्रतिशत बढ़ेगा। यह जानकारी सोमवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। भारत में छोटे प्राइवेट एयरपोर्ट का पूंजीगत व्यय आगामी प्राइवेट एयरपोर्ट के कुल पूंजीगत व्यय का लगभग आधा है। क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, टर्मिनल यूटिलाइजेशन लेवल में पर्याप्त वृद्धि के कारण क्षमता विस्तार से यह वृद्धि होगी। दूसरी ओर बड़े प्राइवेट एयरपोर्ट के पूंजीगत व्यय में इस अवधि के दौरान गिरावट देखी जाएगी, जो आगामी प्राइवेट एयरपोर्ट के बाकी कुल पूंजीगत व्यय का लगभग आधा है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक अंकित हकू ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2028 तक छोटे प्राइवेट एयरपोर्ट अपने मौजूदा आधार से 1.5 गुना तक का महत्वपूर्ण विस्तार कर सकते हैं।
यह वृद्धि बढ़ती यात्र मांग की वजह से देखी जा सकती है। मजबूत मांग की वजह से हवाई यातायात की आवाजाही में सुधार हुआ है। छोटे प्राइवेट एयरपोर्ट पर यात्री यातायात में वित्त वर्ष 2022 और 2025 के बीच 45 प्रतिशत की शानदार सीएजीआर वृद्धि देखी गई।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि, इन एयरपोर्ट पर क्षमता वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है, जोकि इस अवधि में 20 प्रतिशत की मामूली सीएजीआर के साथ दिखी। परिणामस्वरूप टर्मिनल यूटिलाइजेशन लेवल 60 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो गया है और अतिरिक्त क्षमता बनाने की जरूरत बढ़ गई।’ ?इसके अलावा बड़े प्राइवेट एयरपोर्ट के संचालन में उनके स्पॉन्सर्स की विशेषज्ञता और उनकी मजबूत फंड-रेजिंग की क्षमता भी कुछ जोखिमों को कम करती है।’
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