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कमर्शियल गैस महंगी होने से चेन्नई में खाने-पीने के दाम चढ़ने की संभावना

Commercial Gas Price Impact Chennai

Commercial Gas Price Impact Chennai

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दाम में वृद्धि के बाद शहर भर के रेस्तरां में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई गई है, जिससे होटल-रेस्तरां और आम जनता दोनों पर काफी प्रभाव पड़ सकता है।

इससे रेस्टोरेंट को बढ़ते परिचालन खर्चों से निपटने में मुश्किल हो रही है। जिसके चलते आने वाले दिनों में इडली, डोसा जैसे सामान्य नाश्ते की कीमतों में भी 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, पोंगल की एक थाली जिसकी कीमत वर्तमान में 80 हजार है, बढ़कर लगभग 115 रुपए हो सकती है, जबकि डोसे की कीमतें 150 रुपए से बढ़कर 200 रुपए से अधिक हो सकती हैं।

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यह उछाल 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भारी वृद्धि के बाद आया है, जिसकी चेन्नई में कीमतें 3,200 रुपए से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके विपरीत, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। इस वजह से व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए लागत का अंतर और भी बढ़ गया है।

रेस्तरां संचालकों का कहना है कि इस वृद्धि के कारण अतिरिक्त खर्चों को वहन करने के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है, जिससे उन्हें यह बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

कई प्रतिष्ठान रोजाना का खाना पकाने के लिए एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं, कुछ प्रतिष्ठान प्रतिदिन 5 से 10 सिलेंडर तक खपत करते हैं। परिणामस्वरूप ऐसे व्यंजनों की तैयारी कम कर दी है जो गैस की ज्यादा खपत से बनते है।

हालांकि कुछ रेस्तरां ने बिजली से खाना पकाने के विकल्पों की ओर रुख करने पर विचार किया है, लेकिन बिजली की महंगी दरों ने भी अधिकांश के लिए इस बदलाव को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना दिया है।

आतिथ्य सत्कार क्षेत्र वित्तीय दबाव को कम करने के लिए बिजली दरों में कमी और कर रियायतों सहित राहत उपायों की मांग कर रहा है। इसका असर सिर्फ रेस्टोरेंट तक ही सीमित नहीं है। निजी हॉस्टल और पेइंग गेस्ट आवास भी बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वे खाना पकाने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों आपूर्ति पर निर्भर हैं।

हालांकि, तेल कंपनियों द्वारा ऐसे कई ऑपरेटरों को औपचारिक रूप से वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है, जिससे उन्हें निजी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसके चलते आपूर्ति अनियमित हो गई है और कुछ मामलों में कमी के दौरान कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

उद्योग से जुड़े हितधारकों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने या क्षेत्र विशेष को आर्थिक राहत देने के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे न केवल आम उपभोक्ताओं के लिए खाद्य वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, बल्कि लघु एवं मध्यम श्रेणी के खाद्य उद्यमों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है।

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