नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में संभावित अवरोध अब केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समुद्री मार्ग में रुकावट आती है, तो खाड़ी देशों में दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे हालात में सुपरमार्केट और घरों के रेफ्रिजरेटर खाली होने का खतरा बढ़ जाता है।
मध्य पूर्व उन क्षेत्रों में शामिल है जो डेयरी उत्पादों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इस क्षेत्र ने लगभग 13 लाख टन डेयरी उत्पाद आयात किए, जिसकी कुल लागत करीब 4.2 अरब डॉलर थी। यह संकेत है कि खाड़ी देशों की खाद्य सुरक्षा बड़ी हद तक अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर निर्भर है।
कौन से देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे?
खाड़ी देशों में सऊदी अरब सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक आयातक है, जो हर साल लगभग 2.1 अरब डॉलर का आयात करता है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का नंबर है, जो करीब 1.5 अरब डॉलर का डेयरी आयात करता है। इराक, कुवैत, ओमान, बहरीन और कतर भी बड़े पैमाने पर डेयरी उत्पाद खरीदते हैं। हालांकि ईरान खुद बड़े पैमाने पर डेयरी आयातक नहीं है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति इसे खाड़ी देशों के लिए महत्वपूर्ण बना देती है।
यूएई: खाड़ी का सबसे बड़ा डेयरी बाजार
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों ने 2024 में लगभग 2.7 अरब डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात किए। इसमें करीब 43 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ यूएई का रहा, जिससे यह क्षेत्र का सबसे बड़ा डेयरी बाजार बन गया।
सबसे ज्यादा प्रभावित उत्पाद
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समुद्री मार्ग में बाधा आती है, तो होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ये तीन उत्पाद मिलकर पूरे मध्य पूर्व के डेयरी आयात का लगभग 68 प्रतिशत बनाते हैं।
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लंबा मार्ग और बढ़ी लागत
अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे, केप ऑफ गुड होप, से लंबा मार्ग अपनाना पड़ेगा। इससे समय और मालभाड़ा दोनों में वृद्धि होगी, जिससे डेयरी उत्पादों की कीमतें महंगी हो सकती हैं।

