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दिल्ली बजट 2026-27 की हुई तारीफ, शिक्षा मंत्री ने बताया जनता और पर्यावरण दोनों के अनुकूल

Delhi Budget 2026-27 education environment public-friendly

Delhi Budget 2026-27 education environment public-friendly

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश बजट 2026-27 को जनहितकारी हरित बजट बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बजट जनता की आकांक्षाओं और शिक्षा क्षेत्र पर सरकार के विशेष ध्यान को दर्शाता है।

 

शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए सूद ने कहा कि कुल बजट में सबसे अधिक (18.64 प्रतिशत) यानी 19,148 करोड़ रुपए का आवंटन सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली की भाजपा सरकार आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में लगातार ठोस प्रयास कर रही है और विकसित दिल्ली संकल्प पत्र 2025 को जमीनी स्तर पर लागू कर रही है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है। यह बिजली, सड़क और परिवहन जैसे आर्थिक क्षेत्रों और शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल कल्याण जैसे सामाजिक क्षेत्रों दोनों की दिशा और स्थिति निर्धारित करता है।

सूद ने बताया कि जहां पिछली आम आदमी सरकार के कार्यकाल में 2024-25 का बजट 76,000 करोड़ रुपए था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,00,000 करोड़ रुपए हो गया और अब 2026-27 में 1,03,700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो विकास पर सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।

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शिक्षा मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय किसी भी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह 2024-25 में 15,089 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 28,115 करोड़ रुपए और 2026-27 में और बढ़कर 30,800 करोड़ रुपए हो गया, जो मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक विकास का संकेत देता है।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, दिल्ली की जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 में 8.53 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है। तुलनात्मक रूप से, 2024-25 में यह 6.21 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से कम थी। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि औसत मासिक आय 2024-25 में 23,676 रुपए से बढ़कर 2025-26 में 25,453 रुपए हो गई, जो 7.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, यह स्पष्ट रूप से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार को प्रतिबिंबित करती है।

हालांकि, सूद ने इस बात पर जोर दिया कि जीडीपी वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय और पूंजीगत व्यय जैसे आर्थिक संकेतक तभी सार्थक होते हैं जब उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचता है।

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