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डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत में तेजी से बढ़ रही, 2030 तक 20% होगी हिस्सेदारी

नई दिल्ली: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी कुल अर्थव्यवस्था में 2030 तक बढ़कर करीब 20 प्रतिशत हो जाएगी। यह जानकारी सरकार द्वारा दी गई। बीते एक दशक से अधिक समय में देश में डिजिटल आधारित उद्योग 17.3 प्रतिशत की गति से बढ़े हैं। यह इस दौरान पूरी अर्थव्यवस्था की गति 11.8 प्रतिशत से अधिक थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म का तेजी से विस्तार हुआ है और आने वाले वर्षों में यह प्लेटफॉर्म लगभग 30 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं। स्टेट ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में डिजिटल अर्थव्यवस्था में 1.46 करोड़ कर्मचारी या भारत के कार्यबल का 2.55 प्रतिशत हिस्सा कार्यरत था। इनमें से ज्यादातर नौकरियां (58.07 प्रतिशत) डिजिटल आधारित उद्योगों में हैं।

कार्यबल मुख्य रूप से पुरुष है, हालांकि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने महिलाओं के लिए नौकरी के अवसर बढ़ाने में योगदान दिया है। आईटी मंत्रलय ने कहा कि भारत, अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा डिजिटलीकृत देश है और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं में डिजिटलीकरण के स्तर में जी20 देशों में 12वां स्थान है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था पूरी अर्थव्यवस्था की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जो 2029-30 तक राष्ट्रीय आय में लगभग 20}?योगदान देगी।

इसका मतलब यह है कि 6 साल से भी कम समय में देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी कृषि या मैन्युफैक्चरिंग से अधिक हो जाएगी। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरी है, जो 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 11.74}?(31.64 लाख करोड़ रुपए या 402 अरब डॉलर) थी। देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था बढ़ने की वजह एआई, क्लाऊड सर्विसेज का तेजी बढ़ना और ग्लोबल कैपेबिलिटी सैंटर (जीसीसी) का उभरना शामिल है। भारत दुनिया के 55}?जीसीसी की मेजबानी करता है।

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