मुंबई: अमेरिकी डॉलर की वैश्विक कमजोरी का फायदा उठाते हुए भारतीय रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में 17 पैसे मजबूत होकर 86.24 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों के चलते रुपये की यह मजबूती सीमित दायरे में ही रही।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इससे निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है।
रुपया गुरुवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 86.33 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाते हुए 86.24 के स्तर पर आ गया, जो पिछले सत्र की तुलना में 17 पैसे की बढ़त है। इससे पहले बुधवार को रुपया 86.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

शेयर बाजारों में नरमी का असर
रुपये की मजबूती पर घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट का भी असर देखा गया। सेंसेक्स में 124.79 अंकों की गिरावट आई और यह 82,601.85 पर आ गया, जबकि निफ्टी 15.75 अंक फिसलकर 25,204.15 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक जोखिमों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
डॉलर सूचकांक में गिरावट, कच्चे तेल में मामूली बढ़त
दूसरी ओर, डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.06% गिरकर 97.15 पर आ गया। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी मामूली तेजी दर्ज की गई, जहां ब्रेंट क्रूड 0.25% की बढ़त के साथ 68.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
एफआईआई की बिकवाली जारी
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 4,209.11 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह बिकवाली रुपये पर दबाव बनाए रखने का संकेत देती है, जिससे निकट भविष्य में रुपये की दिशा अस्थिर रह सकती है।