Last Updated: November 6, 2026

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Star Rating अनिवार्य होने से 20 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे Fans

January 8, 2023

Star Rating अनिवार्य होने से 20 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे Fans

नई दिल्ली: पंखों को बिजली बचत करने वाली स्टार रेंटिग के साथ बेचना एक जनवरी से अनिवार्य हो जाने से इनके (सींलिग फैन) दाम में आठ से लेकर 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के संशोधित मानकों के अनुरूप अब बिजली की बचत करने की क्षमता के आधार पर बिजली से चलने वाले पंखों को स्टार रेंटिग दी जाएगी। एक स्टार रेंटिग वाला पंखा न्यूनतम 30 प्रतिशत बिजली की बचत करता है जबकि पांच स्टार वाला पंखा 50 प्रतिशत से अधिक बिजली बचा सकता है।

इस बदलाव का जहां हैवल्स, ओरिएंट इलेक्ट्रिक और उषा इंटरनेशनल जैसे प्रमुख पंखा विनिर्माताओं ने स्वागत किया है वहीं इससे पंखों के दाम पांच प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका भी है। दरअसल पांच स्टार वाले पंखों में आयातित मोटर एवं इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे लगाने से उनकी लागत बढ़ जाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब पंखा बनाने वाली कंपनियों को अपने पंखों पर बिजली बचत करने वाली स्टार रेंटिग का लेबल लगाना जरूरी होगा।

ओरिएंट इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राकेश खन्ना ने इसे ‘बड़ा बदलाव’ बताते हुए कहा है कि स्टार रेंटिग व्यवस्था आने से अब ग्राहकों को अधिक बिजली बचाने वाले उन्नत पंखे मिल पाएंगे। लेकिन इसके लिए ग्राहकों को अब अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि बेहतर रेंटिग पाने के लिए पंखों में उन्नत पुर्जे लगाए जाएंगे। उन्होंने कीमतों में सात-प्रतिशत वृद्धि की संभावना जताई है। उषा इंटरनेशनल के सीईओ दिनेश छाबड़ा ने कहा कि स्टार रेंटिग वाले पंखों के इस्तेमाल से ग्राहकों को बिजली का बिल कम करने में मदद मिलेगी लेकिन इन पंखों की खरीद पर उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘उषा कंपनी का एक स्टार रेंटिग वाला पंखा पांच-सात प्रतिशत और पांच स्टार रेंटिग वाला पंखा 20 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा।’’ हैवल्स इंडिया के अध्यक्ष सौरभ गोयल ने कहा कि नए मानक लागू होने से पंखों की उत्पादन लागत में होने वाली आंशिक बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह बदलाव लोगों को बिजली बचत के बारे में जागरूक करने का एक मौका भी है। देश में पंखे का बाजार करीब 10,000 करोड़ रुपये का है। भारतीय पंखा विनिर्माता संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस खंड में 200 से अधिक कंपनियां सक्रिय हैं।

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