नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद नियमित सैलरी भले ही बंद हो जाती है, लेकिन खर्चों की रफ्तार कम नहीं होती। घर का बजट, दवाइयां, मेडिकल चेकअप और रोजमर्रा की जरूरतें लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में अचानक मेडिकल इमरजेंसी या किसी पारिवारिक जरूरत के कारण पैसों की कमी महसूस हो सकती है।
अक्सर देखा जाता है कि स्थायी आय न होने की वजह से बैंक पर्सनल लोन देने में हिचकिचाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि रिटायर्ड लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है। सही योजना और जानकारी के साथ कई ऐसे सुरक्षित तरीके हैं, जिनसे जरूरत के समय फंड का इंतजाम किया जा सकता है।
1. एफडी पर लोन: निवेश भी सुरक्षित, जरूरत भी पूरी
अगर आपने बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कर रखी है, तो उसे तोड़े बिना भी लोन लिया जा सकता है। बैंक एफडी को गारंटी के रूप में स्वीकार करते हैं और उसी के आधार पर लोन प्रदान करते हैं।
आमतौर पर बैंक एफडी राशि का 70% से 80% तक लोन देते हैं।
ब्याज दर एफडी पर मिलने वाले ब्याज से थोड़ी अधिक होती है।
प्रोसेस आसान और कागजी कार्रवाई कम होती है।
इससे आपका निवेश भी सुरक्षित रहता है और जरूरत के समय पैसा भी मिल जाता है।
2. गोल्ड लोन: कम समय में आसान फंडिंग
रिटायर्ड लोगों के लिए गोल्ड लोन एक तेज और सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। इसमें सोने के गहनों को गिरवी रखकर तुरंत लोन लिया जा सकता है।
पर्सनल लोन की तुलना में ब्याज दर कम हो सकती है।
प्रोसेसिंग तेज होती है और दस्तावेज कम लगते हैं।
समय पर किस्त चुकाने पर आपका सोना सुरक्षित वापस मिल जाता है।
इमरजेंसी के समय यह विकल्प काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
3. प्रॉपर्टी के बदले लोन: बड़ी रकम के लिए बेहतर विकल्प
यदि आपके नाम पर मकान, प्लॉट या अन्य संपत्ति है, तो उसके बदले भी लोन लिया जा सकता है। इसे लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी कहा जाता है।
बड़ी रकम की जरूरत होने पर यह विकल्प बेहतर रहता है।
ब्याज दरें आमतौर पर पर्सनल लोन से कम होती हैं।
बैंक इसे सुरक्षित लोन मानते हैं, इसलिए अप्रूवल की संभावना अधिक रहती है।
हालांकि, समय पर भुगतान न करने की स्थिति में संपत्ति पर जोखिम हो सकता है, इसलिए सोच-समझकर निर्णय लेना जरूरी है।
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वित्तीय योजना बनाना है सबसे जरूरी
रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए पहले से प्लानिंग जरूरी है।
इमरजेंसी फंड तैयार रखें।
स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) जरूर लें।
निवेश को पूरी तरह खत्म करने के बजाय लोन विकल्पों पर विचार करें।
सही जानकारी और संतुलित निर्णय से रिटायरमेंट के बाद भी आर्थिक परेशानियों से बचा जा सकता है। जरूरत है तो बस समझदारी और समय पर सही कदम उठाने की।

