नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के घोषित उपाय महज शुरुआत हैं, जबकि अभी आगे और कदम उठाए जा सकते हैं। सीतारमण ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों से उत्पन्न आपात स्थितियों के लिए तैयार रहना जरूरी है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था प्रमुख कच्चे माल के आयात, साथ ही कच्चे तेल और उर्वरकों के आयात से गंभीर दबाव का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार के विश्लेषण से यह पता चला है कि बॉन्ड बाजार विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए एक बेहद अच्छा माध्यम बन सकता है और इससे विदेशी निवेश को प्रभावी रूप से अवशोषित किया जा सकता है। इसके अनुरूप ही सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी निवेशकों के अनुपालन बोझ को कम करने के लिए सरकार ने 5 जून को पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की सूची का विस्तार किया और इसमें जी-सेक के नए निर्गमों को भी शामिल किया।
इसके अलावा, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीओई) को मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट दी गई। निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये उपाय विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की दिशा में पहला कदम हैं। सीतारमण ने कहा कि आरबीआई द्वारा घोषित ढांचे के तहत मुद्रा जोखिम की लागत आरबीआई वहन करेगा, जिससे बैंक बिना बाधा के अपने संसाधन जुटा सकेंगे। सीतारमण ने कहा, इसके परिणामस्वरूप, बैंक अब बिना किसी बाधा के धन जुटा सकते हैं। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5 जून को समाप्त सप्ताह में 71.1 करोड़ अमरीकी डॉलर घटकर 681.610 अरब डॉलर रह गया।

