नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाए गए ज्यादातर आपातकालीन प्रतिबंधों को वापस ले लिया है। यह फैसला पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई सामान्य होने के बाद लिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर पुराने नियमों में संशोधन किया है।
आपूर्ति प्राथमिकता व्यवस्था को किया गया समाप्त
सरकार ने नेचुरल गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 में बदलाव करते हुए उन प्रमुख प्रावधानों को हटाया है, जिनके तहत घरेलू और आयातित गैस का आवंटन प्राथमिकता सूची के आधार पर किया जा रहा था। अब गैस वितरण पहले की तरह सामान्य बाजार और आपूर्ति व्यवस्था के तहत होगा।
9 मार्च को लागू हुए थे आपात प्रतिबंध
ये प्रतिबंध 9 मार्च को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच लगाए गए थे। उस समय अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LNG की आवाजाही प्रभावित हुई थी। कई अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर लागू कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के संकेत मिलने लगे थे।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए सरकार ने उठाए थे सख्त कदम
संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए कई कड़े फैसले लिए थे। इनमें गैस सप्लाई का केंद्रीकृत नियंत्रण, रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की बजाय LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश और बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए डीजल बिक्री पर सीमाएं शामिल थीं।
अब सभी पाबंदियां हटाई जा चुकी हैं
मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में युद्धविराम लागू होने, कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ने और समुद्री मार्गों के पुनः सामान्य होने के बाद इन प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं रह गई है। इससे पहले LPG उत्पादन और डीजल बिक्री से जुड़े प्रतिबंध भी वापस लिए जा चुके हैं।
भारत की ऊर्जा निर्भरता और पश्चिम एशिया की भूमिका
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इनमें से बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर असर डाल सकती है।
पहले कैसे नियंत्रित थी गैस सप्लाई?
आपातकाल के दौरान सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं, औद्योगिक इकाइयों, उर्वरक संयंत्रों और बिजलीघरों के लिए अलग-अलग कोटा तय किया था। पीएनजी, सीएनजी और एलएनजी की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित किया गया था, जबकि कुछ क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सीमित कर दी गई थी।
ये भी पढ़ें…
अब सामान्य हुई सप्लाई व्यवस्था
सरकारी तेल कंपनी गेल को उस समय गैस की पूलिंग और पुनर्वितरण की जिम्मेदारी दी गई थी। अब हालात सामान्य होने के बाद यह नियंत्रण हटाया जा रहा है और आपूर्ति व्यवस्था फिर से सामान्य बाजार तंत्र पर लौट रही है, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

