Gold and Silver Price: कीमती धातुओं में जारी कमजोरी का सिलसिला बुधवार को भी थमता नजर नहीं आया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार पर मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ती ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंकाओं का असर साफ दिखाई दिया।
सुबह के कारोबार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना 0.86 फीसदी फिसलकर ₹1,41,300 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2.06 फीसदी टूटकर ₹2,23,850 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
सोने पर क्यों बढ़ा दबाव?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस वर्ष ब्याज दरों में तीन बार तक बढ़ोतरी कर सकता है। इसी संभावना ने डॉलर को मजबूती दी है, जिसका सीधा असर बुलियन बाजार पर पड़ा है। जून के दौरान डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे महीने बढ़त दर्ज करते हुए 2 फीसदी से अधिक चढ़कर करीब 101.35 के स्तर तक पहुंच गया।
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डॉलर मजबूत होने से महंगा हुआ सोना!
डॉलर मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित होती है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में संभावित दर वृद्धि के संकेतों के साथ 28-29 जुलाई को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर टिकी हैं। बाजार फेड चेयरमैन केविन वार्श की आगामी टिप्पणियों का भी इंतजार कर रहा है।
जून निवेशकों के लिए रहा चुनौतीपूर्ण
जून का महीना कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए भारी गिरावट लेकर आया। MCX के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू हाजिर सोने की कीमतों में महीनेभर में करीब 10 फीसदी यानी ₹15,100 की गिरावट दर्ज हुई और भाव ₹1,40,864 प्रति 10 ग्राम तक आ गए।
चांदी में भी गिरावट जारी
चांदी में गिरावट और भी अधिक रही। 30 जून तक इसकी कीमत लगभग 15 फीसदी यानी ₹38,250 टूटकर ₹2,25,125 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अमेरिकी सोने ने वर्ष 2013 के बाद अपनी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट दर्ज की।
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वैश्विक घटनाक्रम का भी दिखा असर
महंगाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच अमेरिका-ईरान संबंधों से जुड़े घटनाक्रम ने भी बाजार की दिशा प्रभावित की। दोनों देशों के बीच विवाद सुलझाने के लिए बातचीत की सहमति बनने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली, जिसका असर बुलियन बाजार पर भी पड़ा।
हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। एक न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा तनाव के बाद ईरानी प्रतिनिधि अपने अमेरिकी समकक्षों से मुलाकात नहीं करेंगे। इसके अलावा बाजार की नजर जून के एडीपी (ADP) रोजगार आंकड़ों और गुरुवार को जारी होने वाले नॉन-फार्म पेरोल (NFP) डेटा पर भी बनी हुई है, क्योंकि इन्हीं संकेतकों के आधार पर ब्याज दरों की आगे की दिशा तय होने की संभावना है।
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