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मिडिल ईस्ट संकट का असर, सोना-चांदी चमके, सिल्वर में 2% से ज्यादा तेजी

Gold and silver prices surge amid Middle East crisis

Gold and silver prices surge amid Middle East crisis

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं (सोने और चांदी) में फिर से तेजी देखने को मिली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और महंगाई की आशंका के चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों यानी सेफ-हेवन एसेट्स की ओर रुख किया, जिससे शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली।

खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 10.39 बजे) मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी वाला सोना 1,072 रुपए या 0.67 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,60,745 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं मई कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी वाली चांदी 5,333 रुपए यानी 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी के साथ 2,67,524 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

इससे पिछले वाले कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 1,61,525 रुपए प्रति 10 ग्राम के लेवल पर बंद हुआ था, जबकि मई की एक्सपायरी वाली चांदी 2,65,560 रुपए प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी।

दरअसल, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष सातवें दिन में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों में बाधा आई है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी मामूली रूप से बढ़कर 84.11 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोने में 12.60 डॉलर या 0.25% की वृद्धि हुई और यह 5,153.91 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी ने बताया कि सोने में हाल ही में आई तेजी के बाद मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) देखने को मिली, जिससे सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आई। इसके अलावा, यूएस डॉलर इंडेक्स में मजबूती और यूएसडीआईएनआर में ऑल टाइम हाई से आई गिरावट ने भी सोने की कीमतों पर दबाव डाला। हालांकि, इस हल्की गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने में बड़ी गिरावट की संभावना सीमित बनी हुई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

बाजार विशेषज्ञ ने बताया कि स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबर आई कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया। वहीं, ईरान ने क्षेत्र के कई देशों की ओर मिसाइल हमले जारी रखे और अहम ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाने का आरोप लगाया गया। इन घटनाओं से लंबे समय तक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।

ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना पसंद कर रहे हैं। हालांकि बाजार में अलग-अलग तरह की टिप्पणियों के कारण उतार-चढ़ाव भी बढ़ गया है। ईरान ने हाल ही में संकेत दिया है कि अगर अमेरिका के साथ अच्छा समझौता होता है तो वह हमलों में कमी पर विचार कर सकता है।

इसी बीच कई मैक्रो आर्थिक कारक भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें फेडरल रिजर्व की संभावित नीतिगत ढील को लेकर बदलती उम्मीदें, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक बाजारों में तरलता की स्थिति शामिल हैं। जोखिम वाले एसेट्स में समय-समय पर बिकवाली देखने को मिल रही है, जबकि ऊर्जा बाजार, खासकर कच्चे तेल, की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे बाजार में निवेश और जोखिम प्रबंधन की रणनीतियों पर असर पड़ रहा है।

एक्सपर्ट ने कहा कि आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, अमेरिका में शुरुआती बेरोजगारी दावे 2.13 लाख रहे, जो पिछले हफ्ते के बराबर हैं और बाजार के अनुमान 2.15 लाख से थोड़े बेहतर हैं। अब निवेशकों की नजर आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर है, जिनमें यूरोपीय संघ का जीडीपी डेटा, अमेरिका की रिटेल सेल्स, फैक्ट्री ऑर्डर्स और श्रम बाजार से जुड़े अन्य आंकड़े शामिल हैं।

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