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सोने की कीमतों ने बनाया नया रिकॉर्ड, चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार, जानें अक्टूबर में क्या दिखेगा असर?

Gold Price Today

Gold-Silver Price: सितंबर 2025 में बिना किसी बड़े त्योहारी मौके के भी सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली। न बैंड-बाजा, न कोई बड़ा पर्व, फिर भी इन कीमती धातुओं ने बीते महीने निवेशकों को जोरदार रिटर्न दिया।

सोना पहुंचा ₹1.20 लाख के पार, चांदी ने भी दिखाई दमक

सितंबर महीने में सोने की कीमत में ₹12,961 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, चांदी ने रफ्तार पकड़ते हुए ₹24,862 प्रति किलो का उछाल मारा। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के अंतिम कारोबारी दिन पर सोना ₹1,02,388 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1,17,572 प्रति किलो पर बंद हुई थी। अब सितंबर के अंत तक सोना जीएसटी सहित ₹1.20 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया, जो अब तक की रिकॉर्ड ऊंचाई है। वहीं, चांदी भी ₹1.50 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गई, जो इसके इतिहास में एक अहम पड़ाव है।

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2025 में अब तक सोना-चांदी कितना महंगा हुआ?

इस साल की शुरुआत से अब तक (जनवरी से सितंबर 2025) सोने में कुल ₹39,609 प्रति 10 ग्राम और चांदी में ₹56,417 प्रति किलो की तेजी आ चुकी है। इसका मतलब है कि निवेशकों को केवल 9 महीनों में ही जबरदस्त रिटर्न मिला है।

अक्टूबर में क्या रहेगा सोने-चांदी का मिजाज?

विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर में सोने की चमक और तेज हो सकती है। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट बताती है कि बीते छह में से पांच सालों में सितंबर सोने के लिए तेजी भरा रहा है, और अक्टूबर में तो गिरावट का इतिहास ही नहीं रहा।

पिछले 5–6 वर्षों के औसत आंकड़ों को देखें, तो अक्टूबर में सोने की कीमत में करीब 2.58% की औसत बढ़त दर्ज की गई है। इस तेजी की वजह है त्योहारी मांग, वैश्विक स्तर पर हेजिंग की जरूरतें और निवेशकों का बढ़ता भरोसा।

तकनीकी संकेत क्या कहते हैं?

टेक्निकल एनालिसिस के हिसाब से सोना अभी भी एक मजबूत पोजीशन में है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कीमतें अब अपने लॉन्ग-टर्म एवरेज से काफी ऊपर जा चुकी हैं, जो बताता है कि बाजार में तेजी का ट्रेंड ज्यादा खिंच सकता है।

इसका मतलब है कि आने वाले समय में मुनाफावसूली या प्रॉफिट बुकिंग का असर भी देखने को मिल सकता है। फिर भी, अधिकांश विश्लेषक मानते हैं कि सोना फिलहाल “बुल मार्केट” में है, न कि किसी सट्टेबाज़ी वाले बुलबुले में। जब तक बाजार में स्थिरता बनी रहती है और फंडामेंटल सपोर्ट मजबूत है, तब तक इसमें गिरावट की आशंका कम है।

निवेशकों के लिए सलाह

त्योहारी सीजन में सोना-चांदी की मांग और भी बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशक सोच-समझकर कदम बढ़ाएं। अगर कीमतें थोड़ी नीचे आती हैं, तो वह निवेश के लिए बेहतर मौका हो सकता है।

सावधानी के साथ निवेश करें और लॉन्ग टर्म के नजरिए से प्लान बनाएं, क्योंकि आने वाले समय में जियोपॉलिटिकल स्थिति, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बदलाव जैसी चीजें भी सोने-चांदी की दिशा तय करेंगी।

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