नई दिल्ली: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अहम मौद्रिक नीति बैठक से पहले भारतीय सर्राफा बाजार में आज बुधवार को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। निवेशक जहां संभावित नीतिगत फैसलों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं, वहीं डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर दबाव डाला है।
सोने का भाव गिरा, 10 ग्राम हुआ ₹1,09,705
एमसीएक्स (MCX) पर सुबह 10 बजे तक अक्टूबर वायदा वाला सोना ₹1,09,705 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता देखा गया, जोकि पिछले सत्र से करीब 0.41% की गिरावट दर्शाता है। यह कमजोरी मुख्य रूप से डॉलर की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते आई है।
चांदी भी लुढ़की, ₹1,27,304 प्रति किलो पर आई
इसी तरह, चांदी के दिसंबर वायदा की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। यह 1.18% की गिरावट के साथ ₹1,27,304 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। वैश्विक बाजारों में बढ़ते दबाव और डॉलर इंडेक्स की तेजी ने चांदी को भी कमजोर किया।

डॉलर की चाल से हिली सोने-चांदी की बुनियाद
जानकारों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स में 0.10% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। डॉलर की मजबूती का मतलब होता है कि गैर-अमेरिकी निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे उसकी ग्लोबल डिमांड घटती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में गोल्ड और सिल्वर दोनों में सुस्ती देखी जा रही है।
फेड की ब्याज दर कटौती से मिल सकता है
हालांकि बाजार में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि फेडरल रिजर्व आज की बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती कर सकता है। कुछ विश्लेषकों का तो यह भी मानना है कि आने वाले महीनों में 75 से 100 बेसिस प्वाइंट्स की कुल कटौती संभव है। यदि ऐसा हुआ, तो सोने को लॉन्ग टर्म में सपोर्ट मिल सकता है, क्योंकि ब्याज दरों में गिरावट से गोल्ड की निवेश के रूप में मांग बढ़ती है।
2025 में अब तक गोल्ड का जबरदस्त प्रदर्शन
इस साल सोने ने निवेशकों को अब तक शानदार रिटर्न दिया है। जानकारों के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक सोने में 40% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की बढ़ी हुई खरीदारी
डॉलर में शुरुआती कमजोरी
ETF डेटा भी सोने की डिमांड का संकेतक
दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) SPDR Gold Trust की होल्डिंग सोमवार को 976.80 मीट्रिक टन से बढ़कर मंगलवार को 979.95 मीट्रिक टन हो गई। यह बढ़त दर्शाती है कि निवेशक गोल्ड में रुचि दिखा रहे हैं और इसे एक सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं।