सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह डॉलर की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली रही। हालांकि, दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी तनाव के चलते कीमती धातुओं को मध्यम अवधि में अब भी सहारा मिलता दिख रहा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.33 प्रतिशत टूटकर 1,57,550 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 1.92 प्रतिशत गिरकर 2,57,567 रुपये प्रति किलो रह गई।
दिन की शुरुआत में चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी और यह 2,57,100 रुपये प्रति किलो तक फिसल गई थी। इसी तरह सोना भी करीब 1.3 प्रतिशत टूटकर 1,56,001 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया था। बाद में दोनों धातुओं में हल्की रिकवरी देखने को मिली।
मंगलवार को डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर 97.01 पर पहुंच गया, जो पिछले सत्र में 96.82 था। डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों के लिए सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है।
बाजार में उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल ब्याज दरों में कम से कम दो बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो सकती है। आमतौर पर ब्याज दरों में कटौती से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को फायदा मिलता है, क्योंकि निवेश के लिए पैसा सस्ता हो जाता है।
हालांकि कुछ कूटनीतिक संकेत सकारात्मक नजर आ रहे हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वाशिंगटन ने अमेरिकी झंडे वाले जहाजों को ईरानी समुद्री इलाकों से दूर रहने की चेतावनी भी दी है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में सोने की लंबी अवधि की तेजी अब भी बरकरार है। हालिया गिरावट को मुनाफावसूली का नतीजा माना जा रहा है, जो बाजार में सामान्य प्रक्रिया है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कॉमेक्स में चांदी के लिए 65 से 70 डॉलर के दायरे में मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है, जो इसके पुराने सपोर्ट लेवल के आसपास है।
तकनीकी स्तरों की बात करें तो एक्सपर्ट्स के अनुसार सोने को 1,56,600 और 1,54,800 रुपये पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,59,100 और 1,60,000 रुपये इसके लिए अहम रेजिस्टेंस लेवल हैं। वहीं चांदी के लिए 2,55,500 और 2,48,800 रुपये सपोर्ट लेवल माने जा रहे हैं, जबकि 2,68,000 और 2,74,000 रुपये इसके रेजिस्टेंस जोन हैं।
बाजार जानकारों का मानना है कि औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति के चलते चांदी में लंबे समय में तेजी का रुझान बना हुआ है। वहीं सुरक्षित निवेश की मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने को भी लंबी अवधि में मजबूती मिलती रहेगी।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका की जनवरी महीने की रोजगार रिपोर्ट (नॉन-फार्म पेरोल) और महंगाई से जुड़े आंकड़ों पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर साफ संकेत मिल सकते हैं।

