नयी दिल्ली : सरकार ने केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दे दी। इस कदम से छोटे खुदरा कारोबारियों के कारोबार पर असर डाले बिना भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआई आईटी) ने कहा, भारतीय विक्रेताओं को वैश्विक बाजारों तक आसान और व्यापक पहुंच उपलब्ध कराकर निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से मौजूदा एफडीआई नीति की समीक्षा की गई है।
इसके तहत यह निर्णय लिया कि देश में विनिर्मित और/या उत्पादित वस्तुओं एवं उत्पादों के निर्यात के मामले में माल भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर लागू प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। समेकित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के अनुसार, व्यापार-से-व्यापार (बी2बी) ई-कॉमर्स और मार्कीटप्लेस मॉडल में एफडीआई की अनुमति है। कंपनी-से-उपभोक्ता (बी2सी) मॉडल में हालांकि ई-कॉमर्स और भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में एफडीआई की अनुमति नहीं है।
इस मॉडल में वस्तुओं और सेवाओं का भंडार ई-कॉमर्स इकाई के स्वामित्व में होता है और वह उन्हें सीधे उपभोक्ताओं को बेचती है। डीपीआईआईटी ने नीति में एक नया प्रावधान जोड़ा है जिसके अनुसार, ई-कॉमर्स इकाई को विदेश व्यापार नीति, 2023 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात) विनियम, 2015 के लागू प्रावधानों के अनुरूप भारत में विनिर्मित और/या उत्पादित वस्तुओं एवं उत्पादों के केवल निर्यात के लिए माल भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल अपनाने की अनुमति होगी।

