Last Updated: October 3, 2026

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सरकार का बड़ा कदम, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग पर 30 अप्रैल तक मांगे गए सुझाव

March 6, 2026

सरकार का बड़ा कदम, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग पर 30 अप्रैल तक मांगे गए सुझाव

8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सभी हितधारकों से सुझाव और प्रतिनिधित्व आमंत्रित किए हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, इन सुझावों को 30 अप्रैल 2026 तक स्वीकार किया जाएगा।

आयोग ने सेवा में कार्यरत कर्मचारियों, पेंशनर्स के संगठनों और यूनियनों, विभिन्न संस्थानों तथा व्यक्तिगत कर्मचारियों और पेंशनर्स से मेमोरेंडम/प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन स्ट्रक्चर्ड फॉर्मेट उपलब्ध कराया है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, “मेमोरेंडम जमा करने के लिए यह स्ट्रक्चर्ड फॉर्मेट माईगव डॉट इन पोर्टल (इनोवेट इंडिया डॉट माईगव डॉट इन) पर भी उपलब्ध है।”

आयोग ने सभी हितधारकों से अनुरोध किया है कि वे अपने सुझाव और प्रतिनिधित्व केवल इसी पोर्टल के माध्यम से जमा करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कागज आधारित प्रतियां, ईमेल या पीडीएफ फाइलें संभवतः स्वीकार नहीं की जाएंगी।

देश के 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग के जल्द लागू होने के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी का पूरा लाभ लागू होना फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है।

दरअसल, आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इस कारण संभावना है कि वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2027 में लागू न हो पाए। ऐसी स्थिति में आयोग प्रमुख हितधारकों के साथ बातचीत की प्रक्रिया को तेज कर सकता है और मई 2027 की समयसीमा से पहले ही अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है।

आमतौर पर जब किसी नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को पहले शून्य पर रीसेट किया जाता है और उसके बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से फिर से बढ़ाया जाता है।

पिछले संशोधन के बाद डीए और डीआर 58 प्रतिशत पर पहुंच चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग का वित्तीय प्रभाव करीब 1.02 लाख करोड़ रुपए रहा था। हालांकि डीए/डीआर के समायोजन के बाद कर्मचारियों को वास्तविक बढ़ोतरी कुछ कम मिली थी।

लेकिन अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग का वित्तीय प्रभाव इससे काफी ज्यादा हो सकता है, जो करीब 2.4 लाख करोड़ से 3.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इसकी वजह कर्मचारियों की बड़ी संख्या और पेंशनर्स की बढ़ती संख्या बताई जा रही है।

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