नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सोच-समझकर सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाया है और अब इसका असर पूंजी निर्माण में वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग तथा उद्योगों को बैंक कर्ज में वृद्धि के रूप में दिखाई दे रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2026-27 में पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर दिया है। इसमें केंद्र की ओर से राज्यों को पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण के लिए दिए गए अनुदान को शामिल करने पर प्रभावी पूंजीगत खर्च 17 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है।
सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक निवेश के जरिये निजी निवेश को आकर्षित करने का असर अब दिखाई दे रहा है क्योंकि 2026-27 की पहली तिमाही में सकल स्थायी पूंजी निर्माण बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 34% से अधिक हो गया। वास्तविक आधार पर इसमें करीब 12% की वृद्धि हुई। विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन क्षमता का उपयोग बढ़कर 75% हो गया है। उन्होंने कहा, आर्थिक गतिविधियों में इस तेजी को दोहरे बही-खाते की समस्या के समाधान से बल मिला है।
उन्होंने कहा कि उद्योग को मिलने वाले बैंक कर्ज में भी तेजी आई है और जून, 2026 में इसमें सालाना आधार पर 19% की वृद्धि हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि जरूरतमंद क्षेत्रों तक कर्ज पहुंच रहा है और सरकार के मुक्त व्यापार समझौते भारत के श्रम-प्रधान वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजार खोल रहे हैं। सीतारमण ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार 3% से नीचे रहने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 8% की दर से बढ़ रही है। हाल में जारी तिमाही के आंकड़े भी ज्यादातर अनुमानों से बेहतर रहे हैं। यह वृहद आर्थिक स्थिरता दुनिया का भारत के प्रति नजरिया बदल रही है सीतारमण ने कहा कि 35 साल से अधिक समय में यह पहली बार है जब भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मिली है।
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