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पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सरकार ने निर्यात केंद्रित उपायों का किया विस्तार

नई दिल्ली : सरकार ने भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों की मदद के लिए ‘रिलीफ’ स्कीम और ‘एक्सपोर्ट किए गए प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी और टैक्स में छूट’ (आरओडीटीईपी) स्कीम की समय-सीमा बढ़ा दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, ‘रिलीफ’ (आरईएलआईईएफ — रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) योजना के दूसरे हिस्से की समय-सीमा बढ़ाई गई है। इसके तहत निर्यातकों को कुछ खास इलाकों में अगले शिपमैंट के लिए ईसीजीसी कवर लेने पर 95 प्रतिशत रिस्क कवर मिलता है।

यह सुविधा 16 मार्च, 2026 या उसके बाद ली गई ‘स्टैंड-अलोन पॉलिसी’ या ‘होल टर्नओवर पॉलिसी’ के लिए उपलब्ध है। योग्य कार्गो में एफसीएल, एलसीएल और रीफर कंटेनर शामिल हैं, जबकि एनर्जी शिपमैंट इसमें शामिल नहीं हैं। रिलीफ स्कीम 19 मार्च को शुरू की गई थी। इसका मकसद मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में मैरीटाइम कॉरिडोर में रुकावटों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को बढ़ी परिवहन लागत, इंश्योरेंस प्रीमियम और युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिम में मदद करना था।

इसके अलावा, सरकार ने आरओडीटीईपी स्कीम को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। यह डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स, एडवांस ऑथराइजेशन होल्डर्स, स्पेशल इकोनॉमिक जोन यूनिट्स और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स के निर्यात के लिए उपलब्ध रहेगी। आरओडीटीईपी के तहत निर्यात किए गए उत्पादों पर लगने वाले उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय ड्यूटी, टैक्स और लेवी का रिफंड दिया जाता है, जिन पर पहले छूट नहीं मिली है। मौजूदा आरओडीटीईपी रेट और वैल्यू कैप इस अवधि में बिना बदलाव के लागू रहेंगे।

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