नई दिल्ली: देश में माल एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था को झटका देते हुए बीते वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 25,009 फर्जी कंपनियों द्वारा 61,545 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया गया है। केंद्रीय और राज्य जीएसटी अधिकारियों की सतर्कता और व्यापक छानबीन के चलते यह बड़ा घोटाला सामने आया, जो कर प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
-प्रशासन द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार
वर्ष 2024-25 में 1,924 करोड़ रुपये की फर्जी ITC को रोका गया और 168 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह अभियान केवल एक वर्ष तक सीमित नहीं रहा। वित्त वर्षों 2023-24 और 2024-25 को मिलाकर देखा जाए तो कुल 42,140 फर्जी इकाइयों का पता चला, जिन्होंने 1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी को अंजाम देने का प्रयास किया।
-GSTN की भी बड़ी भूमिका रही
इन प्रयासों में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ GST Network (GSTN) की भी बड़ी भूमिका रही। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि “फर्जी ITC दावों को रोकने के लिए एक समन्वित रणनीति अपनाई गई है, जिसमें संदिग्ध पंजीकरण की जांच, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और ई-वे बिल की गतिविधियों की निगरानी जैसे कदम शामिल हैं।”
इनपुट टैक्स क्रेडिट दरअसल जीएसटी व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके तहत व्यवसाय अपने आपूर्तिकर्ताओं से खरीदे गए माल या सेवाओं पर चुकाए गए कर को अंतिम कर भुगतान से समायोजित कर सकते हैं। लेकिन यही प्रणाली, फर्जी कंपनियों द्वारा बिना किसी वास्तविक व्यापारिक लेन-देन के, झूठे बिलों के जरिए धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।
-GST विभाग द्वारा उठाए गए सख्त कदम
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए अब जीएसटी विभाग द्वारा डिजिटल निगरानी, AI-संचालित डिटेक्शन सिस्टम, और पंजीकरण जांच प्रक्रिया को और सख्त बनाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो सकता है, बल्कि यह ईमानदार कारोबारियों के लिए भी प्रतिस्पर्धा को असमान बना देगा। सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत हैं कि फर्जी कंपनियों और कर चोरों पर शिकंजा लगातार कसा जाएगा और जीएसटी व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के प्रयास तेज किए जाएंगे।

