विशाखापत्तनम: हिन्दुस्तान पैट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने अपनी विशाख रिफाइनरी में अवशेष उन्नयन सुविधा का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया है। ये परियोजना भारत की डीप-कन्वर्जन रिफाइनिंग क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और इससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप, इस परियोजना में कई प्रमुख उपकरणों का निर्माण देश में ही किया गया है। इससे भारतीय रिफाइनिंग क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और इंजीनियरिंग क्षमता को बढ़ावा मिला है।
भारत में अपनी तरह की यह पहली सुविधा उन्नत इंजीनियरिंग का उदाहरण है, जिसमें विश्व के सबसे भारी एलसी-मैक्स रिएक्टर शामिल हैं। प्रत्येक रिएक्टर का वजन लगभग 2,200 मीट्रिक टन है। 3.55 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाली यह सुविधा उन्नत एलसी-मैक्स आधारित रेजिड हाइड्रोक्रैकिंग तकनीक पर आधारित है। इससे बॉटम ऑयल का करीब 93} उच्च मूल्य वाले पैट्रोलियम उत्पादों में रूपांतरण किया जाता है। इससे विशाख रिफाइनरी के मध्य-डिस्टिलेट उत्पादन में लगभग 10} की वृद्धि हुई है। आरयूएफ के शुरू होने से रिफाइनरी के सकल रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार, ऊर्जा लागत में कमी और परिचालन दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।

