नयी दिल्ली: विदेशी बाजारों में मजबूती के रुख और शिकागो में सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) और सोयाबीन तिलहन के दाम मजबूत होने से शुक्रवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोयाबीन तिलहन के दाम में सुधार रहा जबकि विदेशों से खाद्यतेलों के आयात में होने वाले नुकसान के खत्म होने के कारण सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन और बिनौला तेल के दाम के साथ साथ सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
मलेशिया एक्सचेंज मजबूत बंद हुआ जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में भी फिलहाल मजबूती है।बाजार सूत्रों ने कहा कि पिछले दिनों आयातित खाद्यतेलों को बंदरगाह पर लागत से कम दाम पर बेचने से जो नुकसान हो रहा था, वह नवंबर- दिसंबर में आयात घटने की संभावनाओं के कारण नुकसान में की जाने वाली बिकवाली अब खत्म हो गयी है। यानी जिस लागत से खाद्यतेलों का आयात किया जा रहा है, वह लागत भाव के बराबर ही बिकने लगा है। सोयाबीन तिलहन में तेजी की मुख्य वजह शिकागो में सोयाबीन डीओसी और सोयाबीन तिलहन का दाम मजबूत होना तथा देश में किसानों द्वारा पिछले सालों के मुकाबले कहीं कम दाम (न्यूनतम समर्थन मूल्य – एमएसपी के आसपास) पर अपनी ऊपज कम बिग्री करना है। इन स्थिति में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज (तिलहन फसलें) के दाम में कुछ सुधार रहा।सूत्रों ने कहा कि देशी तेल तिलहनों के दाम अभी भी आयातित तेलों के मजबूत हैं जिसकी वजह से इनकी मांग होने के बावजूद खपत पर्याप्त रूप से नहीं बढ़ रही है।
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