
Income Tax Return New Rules : नई दिल्ली: जैसे-जैसे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय करीब आ रहा है, वैसे ही टैक्स बचाने की कोशिशें भी तेज होती जा रही हैं। लेकिन इस बार सिर्फ पर्चियां लगाकर टैक्स छूट का दावा करना आसान नहीं होगा। वित्तवर्ष 2025-26 के लिए आयकर विभाग ने रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए हैं। खासकर, पुराने टैक्स रिजीम में छूट और कटौती का दावा करने वाले करदाताओं के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण हैं।
-अब डिटेल भरना अनिवार्य
इनकम टैक्स विभाग ने इस बार स्पष्ट कर दिया है कि टैक्स छूट का दावा करने के लिए केवल दस्तावेज अटैच करना काफी नहीं होगा। करदाताओं को अब अपने हर निवेश, दान, बीमा, होम लोन और किराए से जुड़ी विस्तृत जानकारी ITR फॉर्म में भरनी होगी। चाहे वो सेक्शन 80C के तहत किया गया निवेश हो या HRA के अंतर्गत क्लेम किया गया किराया—हर चीज़ की जांच की जाएगी और उसके बाद ही टैक्स छूट मंजूर की जाएगी।
–बीमा, होम लोन और किराया सबकी देनी होगी पूरी जानकारी
अगर आप बीमा पर टैक्स छूट का लाभ लेना चाहते हैं, तो आपको उस बीमा कंपनी का नाम, पॉलिसी नंबर, प्रीमियम की राशि और भुगतान की तारीखें स्पष्ट रूप से भरनी होंगी। वहीं, होम लोन पर मिलने वाली छूट के लिए लोन अकाउंट नंबर, बैंक का नाम, और भुगतान की पूरी जानकारी देनी अनिवार्य कर दी गई है।
इसके अलावा, अगर आप हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का क्लेम कर रहे हैं, तो मकान मालिक का नाम, पता, और पैन नंबर देना अनिवार्य हो गया है। ऐसे मामलों में किराया भुगतान के बैंक ट्रांजेक्शन या रसीद की जानकारी भी मांगी जा सकती है।
-कंपनियों से भी मांगी जाएगी डिटेल
जो कर्मचारी अपने नियोक्ता के माध्यम से टैक्स छूट का दावा करते हैं, उनके लिए कंपनियों को भी अब अधिक पारदर्शिता दिखानी होगी। एचआरए, एलटीए जैसे क्लेम्स के लिए एचआर डिपार्टमेंट से सैलरी स्ट्रक्चर और भत्तों की सटीक जानकारी साझा करनी होगी।
-टैक्स चोरी पर नकेल कसने की तैयारी
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है। अब तक देखा गया है कि कई करदाता बिना पर्याप्त दस्तावेज या जांच योग्य जानकारी दिए फर्जी क्लेम कर लेते थे। लेकिन नए नियमों के तहत अब हर छूट का आधार जांचा जाएगा और फर्जी दावे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
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