नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमरीका से मिली 30 दिन की अस्थायी छूट का लाभ उठाते हुए समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। शुक्रवार को सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार भारतीय रिफाइनरों ने लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है, जो अधिकतर गैर-प्रतिबंधित इकाइयों से लिया गया है। रिफाइनिंग कंपनियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या अमरीकी छूट के तहत प्रतिबंधित संस्थाओं से भी खरीद की अनुमति मिल सकती है।
अमरीका ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल की खरीद पर कई पाबंदियां लगाई थीं, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के बाद 30 दिन का लाइसैंस जारी किया गया है। इसके तहत 5 मार्च 2026 से पहले जहाजों पर लोड रूसी कच्चे तेल या पैट्रोलियम उत्पादों की भारत में आपूर्ति और उतारने की अनुमति दी गई है। यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी, बशर्ते खरीदार भारतीय कानून के तहत पंजीकृत इकाई हो। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण हाल के महीनों में खरीद कम हो गई थी।
फरवरी के अंत तक भारत रूस से लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीद रहा था, जो मई 2023 के 21.5 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से काफी कम है। फिलहाल करीब 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में टैंकरों पर मौजूद है, जबकि लगभग 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास खड़े जहाजों में है। इसके अलावा भूमध्य सागर और स्वेज नहर क्षेत्र में भी रूसी तेल के टैंकर मौजूद हैं, जो एक महीने के भीतर भारत पहुंच सकते हैं। हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पैट्रोकैमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने दिसंबर के बाद रूसी तेल खरीद फिर शुरू कर दी है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी रूसी तेल की डिलिवरी की तलाश में है।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होमरुज जलडमरूमध्य से तेल और एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में भारत अपने भंडार को मजबूत करने के लिए समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल की खरीद बढ़ा रहा है। अमरीकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट अस्थायी है और इसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है। विेषकों के अनुसार यह राहत अल्पकालिक है, क्योंकि पश्चिम एशिया से प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है।