Last Updated: November 6, 2026

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BRICS देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27% बढ़ा, समिट के बाद और तेजी की उम्मीद

September 11, 2026

BRICS देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27% बढ़ा, समिट के बाद और तेजी की उम्मीद

नई दिल्ली: भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षेत्र ने ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईएससी) ने शुक्रवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27 प्रतिशत बढ़ा, जो देश के कुल निर्यात की 26.53 प्रतिशत वृद्धि दर से कहीं अधिक है।

ईएससी ने बयान में क्या कहा?

ईएससी ने एक बयान में कहा कि नई दिल्ली में 12-13 सितंबर के बीच आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान डिजिटल सहयोग और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाए जाने के बाद इस गति को और मजबूती मिल सकती है। ईएससी ने कहा कि यह मजबूत प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि ब्रिक्स देशों के साथ डिजिटल और तकनीकी सहयोग को व्यावसायिक अवसरों में बदलने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। संगठन का मानना है कि यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

ब्रिक्स देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और चीन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के सबसे बड़े आयातक बने हुए हैं। परिषद के अनुसार, इन दोनों देशों का संयुक्त योगदान ब्रिक्स देशों को होने वाले भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 88.50 प्रतिशत रहा। उत्पाद श्रेणियों की बात करें तो दूरसंचार उपकरण सबसे बड़ा निर्यात सेगमेंट रहा, जिसकी हिस्सेदारी कुल निर्यात में 74.60 प्रतिशत रही।

वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 19.61 प्रतिशत योगदान

ईएससी ने बताया कि ब्रिक्स देशों का भारत के कुल वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 19.61 प्रतिशत योगदान है। परिषद का कहना है कि सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग नेटवर्क उपकरणों, डिवाइस सर्टिफिकेशन और साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने वाले सॉफ्टवेयर की मांग को बढ़ा सकता है। ईएससी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं कार्यकारी निदेशक (ईडी) गुरमीत सिंह ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान एजेंडे में शामिल कई विषय भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन प्रस्तावों को सदस्य देश किस गति और गंभीरता से आगे बढ़ाते हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी पर चर्चा और पिछले महीने पुणे में भारत एवं ब्राजील के बीच संपन्न सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समझौता इस दिशा का संकेत देता है। समझौते में 5जी, 6जी, ओपन रैन और उपग्रह कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है, जो भविष्य में ब्रिक्स डिजिटल सहयोग का आधार बन सकते हैं।

परिषद ने यह भी कहा कि प्रस्तावित ब्रिक्स ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान 2026-2030 और एमएसएमई सहयोग पोर्टल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों, को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और वैश्विक विनिर्माण नेटवर्क में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे

ईएससी के अध्यक्ष राजेश रेवंकर ने कहा कि यह प्रस्तावित ढांचा भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि वे उभरती सीमा-पार मूल्य शृंखलाओं का हिस्सा बन सकेंगे। परिषद ने एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग तंत्र का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य एमएसएमई के सामने आने वाली व्यापार वित्तपोषण संबंधी चुनौतियों को कम करना है। उद्योग जगत का कहना है कि यह व्यवस्था सऊदी अरब, रूस, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों में विस्तार की योजना बना रहे भारतीय निर्यातकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।

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