Last Updated: October 17, 2026

Dainik Savera Times Logo

सरकार का अनुमान, 2030 तक भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार दोगुना होकर $16.2 अरब होगा

May 2, 2026

सरकार का अनुमान, 2030 तक भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार दोगुना होकर $16.2 अरब होगा

सरकार ने शनिवार को कहा कि भारत ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी)’ यानी मेडिकल टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है, और मेडिकल टूरिज्म बाजार 2025 में लगभग 8.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

वैश्विक स्तर पर एमवीटी बाजार 2022 में करीब 115.6 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक लगभग 286.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें सालाना करीब 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर (सीएजीआर) रहने की संभावना है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दुनिया भर में बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, लंबा इंतजार और लाइफस्टाइल बीमारियों के बढ़ते बोझ के कारण लोग इलाज के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें : https://dainiksaveratimes.com/business/delhi-court-loan-fraud-ed-custody/

भारत में एमवीटी (मैच्योर व्हीकल थेरेपी) का उदय आयुष जैसी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ उन्नत चिकित्सा अवसंरचना के एकीकरण से प्रेरित है। इसके अलावा मजबूत नीतिगत समर्थन, डिजिटल सुविधाओं और आयुष वीजा व क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों जैसी पहल से इस सेक्टर को मजबूती मिल रही है।

भारत का एमवीटी सिस्टम दो हिस्सों में काम करता है—एक, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल टूरिज्म और दूसरा, योग और आयुर्वेद जैसी आयुष पद्धतियों पर आधारित वेलनेस टूरिज्म।

यह दोनों मिलकर उन्नत इलाज और बढ़ती रोकथाम (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) की जरूरतों को पूरा करते हैं।

2025 में भारत में 9.15 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से 5,07,244 लोग इलाज के लिए आए थे। यानी कुल विदेशी पर्यटकों में मेडिकल टूरिज्म की हिस्सेदारी लगभग 5.5 प्रतिशत रही।

वर्ष 2025 में मेडिकल टूरिज्म के लिए भारत आने वाले प्रमुख देशों में बांग्लादेश (325,127), इराक (30,989), उज्बेकिस्तान (13,699), सोमालिया (11,506), तुर्कमेनिस्तान (10,231), ओमान (9738) और केन्या (9,357) शामिल रहे।

मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स 2020-21 के अनुसार, भारत दुनिया के 46 प्रमुख मेडिकल टूरिज्म देशों में 10वें स्थान पर रहा, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के टॉप 10 वेलनेस डेस्टिनेशन में पांचवें स्थान पर है।

भारत की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रमाणन प्रणाली से समर्थित हैं। देश भर के अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता राष्ट्रीय अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त करते हैं, जो मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

आगे की योजना के तहत, सरकार ने बजट 2026-27 में पांच रीजनल मेडिकल हब बनाने का प्रस्ताव रखा है। इन हब में मेडिकल, शिक्षा और रिसर्च सुविधाएं होंगी, साथ ही आयुष सेंटर और एमवीटी सुविधा केंद्र भी शामिल होंगे।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें