Last Updated: October 17, 2026

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भारत-न्यूजीलैंड समझौते से कृषि और समुद्री निर्यात को बढ़ावा

April 27, 2026

भारत-न्यूजीलैंड समझौते से कृषि और समुद्री निर्यात को बढ़ावा

भारत-न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का उद्योगों ने स्वागत किया और कहा कि इससे भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच में सुधार होगा और निर्यातकों विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि एफटीए से कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान और आईटी एवं आईटीईएस जैसी सेवाओं, व्यावसायिक सेवाओं, इंजीनियरिंग, शिक्षा, निर्माण और स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए द्विपक्षीय व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।

उन्होंने कहा कि इससे हमारे निर्यातकों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती मांग वाले उच्च मूल्य वाले बाजार में प्रवेश करने के अपार अवसर प्राप्त होंगे।

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एफटीए ढांचे के तहत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, डेयरी अल्टरनेटिव और जैविक उत्पाद जैसे क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। जैविक प्रमाणन के लिए पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (एमआरए) से बाजार में प्रवेश आसान होगा, जबकि आयुष उत्पादों को पहली बार प्रवेश मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, सेवा क्षेत्र को बेहतर गतिशीलता प्रावधानों और व्यावसायिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता से लाभ होने की संभावना है।

रल्हन ने आगे कहा कि कम टैरिफ बाधाओं और सुव्यवस्थित व्यापार प्रक्रियाओं के साथ, भारतीय व्यवसायों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता का लाभ मिलेगा।

इससे भारत के निर्यात गंतव्यों में विविधता आएगी और पारंपरिक बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी। उन्होंने कहा कि निर्यातकों को इस समझौते की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए अपने उत्पाद मानकों और विपणन रणनीतियों को सक्रिय रूप से संरेखित करना चाहिए।

ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई) के अध्यक्ष रोहित सिंगला ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि-खाद्य उत्पादों, जिनमें प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, मसाले और समुद्री उत्पाद शामिल हैं, के लिए बाजार पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, क्योंकि इससे शुल्क कम होंगे और गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने में सुविधा मिलेगी।

सिंगला ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, ट्रेसबिलिटी और टिकाऊ प्रथाओं में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता भारत की बढ़ती क्षमताओं को पूरक कर सकती है, जिससे हमारे निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रभावी ढंग से एकीकृत होने में मदद मिलेगी।

न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत में भेड़ के मांस, कुछ फलों, मनुका शहद और प्रीमियम पेय पदार्थों जैसे उत्पादों का निर्यात करने पर रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा। कीवी फल, सेब, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे उत्पादों पर रियायतें निर्धारित कोटे के तहत दी गई हैं।

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