
नई दिल्ली : भारत ने अमरीका के साथ व्यापार से जुड़े मुद्दों को एकतरफा कदमों के बजाय द्विपक्षीय वार्ताओं के जरिए सुलझाने पर जोर देते अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) से प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही भारत ने कहा कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों पर यूएसटीआर की ‘धारा 301’ के तहत की गई जांच में कई विसंगतियां हैं। वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने कहा कि भारत बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन को संवैधानिक दायित्व और अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांतों के तहत गंभीरता से लेता है।
उन्होंने कहा कि यूएसटीआर की रिपोर्ट प्रासंगिक कानूनी मानकों को पूरा नहीं करती और बिना पर्याप्त साक्ष्य के किसी देश पर व्यापक शुल्क लगाना उचित नहीं है। इस सुनवाई के बारे में यूएसटीआर की वैबसाइट पर प्रकाशित विवरण के मुताबिक, भारत ने कहा कि यूएसटीआर का यह निर्णय देशव्यापी शुल्क लगाने का कोई तार्किक कारण नहीं बताता है और यह अनुचित रूप से भारत सहित 46 अर्थव्यवस्थाओं को एक ही श्रेणी में रखता है।
भारत ने कहा कि जांच की पद्धति त्रुटिपूर्ण है क्योंकि यह कुछ चुनिंदा मामलों और व्यापक व्यापार रुझानों के आधार पर निष्कर्ष निकालती है, जबकि देश-विशिष्ट या क्षेत्र-विशिष्ट प्रमाण नहीं दिए गए हैं। भारत के मामले में यह साबित नहीं किया गया है कि आयात प्रतिबंध की कमी से अमरीकी उद्योग को नुक्सान पहुंचाने वाला कोई अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है। उद्योग संगठनों फिक्की और सीआईआई ने भी प्रस्तावित शुल्क का विरोध करते कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ अमरीकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी लागत का बोझ बढ़ेगा।
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