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भारत में मार्च के दौरान यात्री वाहन बिक्री में 16% की बढ़त

India Passenger Vehicle Sales

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भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 4.4 लाख यूनिट्स हो गई है और इसमें तिमाही आधार पर 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग को माना जा रहा है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में ऑटोमोबाइल की थोक बिक्री वित्त वर्ष 27 में 4-6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसे जीएसटी में कटौती और नए मॉडल के लॉन्च होने से फायदा होगा।

नए मॉडलों के लॉन्च की लगातार बढ़ती मांग और संशोधित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों के निरंतर सकारात्मक प्रभाव के चलते मार्च में खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

जीएसटी दरों में बदलाव के बाद वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में थोक बिक्री में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि दूसरी छमाही में इसमें 17 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। खुदरा बिक्री में भी 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह अब तक के उच्चतम स्तर 46 लाख यूनिट तक पहुंच गई।

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रिपोर्ट में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार खुदरा बिक्री में मजबूती के चलते इन्वेंट्री का स्तर मार्च 2026 तक घटकर लगभग 28 दिन रह गया, जबकि मार्च 2025 के अंत में यह 52-53 दिन और सितंबर 2025 में 60 दिन था।

वित्त वर्ष 2026 में यात्री वाहनों (पीवी) की कुल बिक्री में यूटिलिटी वाहनों (यूवी) का हिस्सा 68 प्रतिशत था। हालांकि यूवी वाहनों की बिक्री में सबसे अधिक हिस्सेदारी बनी हुई है, लेकिन जीएसटी दरों में कटौती के बाद मिनी, कॉम्पैक्ट और सुपर-कॉम्पैक्ट सेगमेंट में बिक्री में थोड़ी वृद्धि हुई है।

यूवी सेगमेंट बिक्री का मुख्य चालक बना रहेगा, हालांकि यात्री कारों की मांग में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2026 में निर्यात में 18 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि यह वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि भारतीय निर्माताओं द्वारा आपूर्ति बढ़ाने के संकेत देती है।

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