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India Solar Capacity 136 GW पहुंची, बोले Pralhad Joshi

India Solar Capacity 136 GW

India Solar Capacity 136 GW

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता अब लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह विकास इस बात का प्रमाण है कि लगातार नीति प्रतिबद्धता और नवाचार से क्या हासिल किया जा सकता है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ती गति और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की भूमिका दुनियाभर में स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज करने में महत्वपूर्ण है।

आईएसए फाउंडेशन डे समारोह में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है।

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उन्होंने कहा, “पिछले दशक में, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने सौर ऊर्जा के वादे को दुनिया भर में वास्तविक, जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में मदद की है। जहां सौर ऊर्जा की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, वहां आईएसए ने उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, समुदायों तक स्वच्छ, भरोसेमंद बिजली पहुँचाई है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।”

उन्होंने बताया कि जो एक शक्तिशाली दृष्टि के रूप में शुरू हुआ था, वह आज 120 से अधिक देशों के गठबंधन में बदल गया है, जो वैश्विक सौर संक्रमण को तेज करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने प्रमुख पहलों को भी उजागर किया, जो सौर ऊर्जा के लाभों को सीधे लोगों तक पहुँचाने में मदद कर रही हैं। जैसे पीएम सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना लाखों घरों को अपनी स्वच्छ बिजली उत्पन्न करने में सक्षम बना रही है और पीएम-कुसुम से किसानों को सौर-संचालित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में पहले 1,000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग पच्चीस साल लगे जबकि अगले 1,000 गीगावाट की स्थापना अपेक्षाकृत तेजी से होने की संभावना है, जो वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में एक नए युग का संकेत देता है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का केंद्र धीरे-धीरे वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को तेजी से पार करने का अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करते हैं।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि आईएसए एक अद्वितीय प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है, जो सरकारों, विकास भागीदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के विस्तार को बढ़ावा देता है और सतत विकास के नए अवसर खोलता है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा, “हमारे सदस्य अफ्रीका, एशिया और प्रशांत, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन, यूरोप और अन्य क्षेत्रों में आईएसए की प्रगति के सच्चे संरक्षक हैं। उनकी विश्वास, नेतृत्व और महत्वाकांक्षा हर उपलब्धि को परिभाषित करती है। मैं हमारे 77 साझेदार संगठनों और आईआईटी दिल्ली में प्रशिक्षित युवा सौर पेशेवरों के बढ़ते समुदाय का भी आभारी हूं, जो इस मिशन को हर दिन आगे बढ़ाते हैं।”

इस गठबंधन की स्थापना 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और फ्रांस ने कॉप-21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की थी।

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