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अप्रैल में भारत के स्टील सेक्टर की मजबूत वृद्धि जारी: सरकार

India Steel Sector Growth

India Steel Sector Growth

बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत के स्टील सेक्टर ने अप्रैल में अपनी मजबूत ग्रोथ बरकरार रखी। कच्चे स्टील का उत्पादन 5.8 प्रतिशत बढ़कर 14.09 मिलियन टन हो गया, जो पिछले साल इसी महीने में 13.31 मिलियन टन था। इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी के चलते घरेलू मांग भी मजबूत बनी रही।

मजबूत मांग के कारण स्टील की कीमतों में भी सुधार देखने को मिला और लगभग सभी प्रमुख उत्पादों की कीमतें बढ़ीं।

अप्रैल में हॉट मेटल उत्पादन में सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिग आयरन उत्पादन 6 प्रतिशत घटकर 0.69 मिलियन टन रहा। फिनिश्ड स्टील का उत्पादन 3.4 प्रतिशत बढ़कर 13.05 मिलियन टन पहुंच गया। वहीं, फिनिश्ड स्टील की खपत 12.99 मिलियन टन रही, जो 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

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व्यापार के मोर्चे पर अप्रैल में स्टील का आयात 0.68 मिलियन टन और निर्यात 0.47 मिलियन टन रहा, जिससे भारत इस महीने हल्का शुद्ध आयातक बना रहा। पिछले साल अप्रैल की तुलना में आयात में 30.8 प्रतिशत और निर्यात में 24.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की कुल स्टील उत्पादन क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष रही, जो 2030 तक 300 मिलियन टन के लक्ष्य की दिशा में बढ़ रही है। एसएआईएल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जेएसपीएल और एएमएनएस जैसे बड़े खिलाड़ी क्षमता बढ़ाने में निवेश जारी रखे हुए हैं।

हाल ही में टाटा स्टील ने लुधियाना में 3,200 करोड़ रुपए की लागत से स्क्रैप-आधारित ईएएफ ग्रीन स्टील प्लांट शुरू किया है, जो पंजाब का अपनी तरह का पहला प्लांट है।

कीमतों की बात करें तो टीएमटी/रीबार की कीमतों में महीने-दर-महीने करीब 2.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। फ्लैट स्टील की कीमतों में और ज्यादा तेजी रही, जिसमें एचआर कॉइल लगभग 6.3 प्रतिशत और जीपी शीट करीब 7.3 प्रतिशत बढ़ी।

स्टील मंत्रालय की ‘ग्रीन स्टील’ पहल के तहत, एनआईएसएसटी को प्रमाणन एजेंसी बनाया गया है। 31 मार्च 2026 तक एनआईएसएसटी ने 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इनमें टीएमटी बार, कॉइल, वायर रॉड और पाइप जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर को 5-स्टार रेटिंग मिली है।

कच्चे माल की कीमतों में मिश्रित लेकिन मजबूत रुख देखने को मिला। घरेलू लौह अयस्क (आयरन ओर) की कीमतों में 10 से 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई, जो स्टील सेक्टर की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

वैश्विक बाजार में लौह अयस्क की कीमतें स्थिर रहीं, जबकि कोकिंग कोल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी जारी रही, जिससे उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्क्रैप की कीमतें लगभग स्थिर रहीं, जिससे इलेक्ट्रिक स्टील उत्पादकों को कुछ राहत मिली।

सरकार का मानना है कि भारत का स्टील सेक्टर इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के चलते आगे भी मजबूत बना रहेगा। हालांकि, ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में इस सेक्टर के लिए अहम रहेंगे।

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