एक विश्लेषण में कहा गया है कि अगर भारत को वैश्विक स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाना है, तो उसे अत्याधुनिक तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ना होगा। रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, एडवांस्ड फार्मा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम लागत वाली सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं ऐसे क्षेत्र बताए गए हैं, जहां मजबूत रणनीति बनाकर भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत कर सकता है। सुझाव यह है कि अमेरिका के अनुभव से सीख लेते हुए भारत अपनी अलग और व्यावहारिक नीति तैयार करे, ताकि दूसरे देश उसकी क्षमताओं पर निर्भर हों।
‘इंडिया नैरेटिव’ में प्रकाशित श्रिजीत फडके के लेख में अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि रक्षा और आईटी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी बढ़त और मजबूत वित्तीय ढांचे ने उसे वैश्विक राजनीति में खास बढ़त दी है। जिन सेक्टरों में दुनिया को उसकी जरूरत पड़ती है, वही उसकी असली ताकत बनते हैं।
लेख के अनुसार भारत को अपने सिद्धांतों से समझौता किए बिना निरंतर नवाचार पर जोर देना चाहिए। संगठित और दीर्घकालिक प्रयासों से ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी ढांचे का अहम हिस्सा बन जाएं। इसमें रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, सस्ती व उन्नत दवाएं, विकासशील देशों के लिए ओपन-सोर्स एआई, किफायती सैटेलाइट सेवाएं और यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का अंतरराष्ट्रीय विस्तार शामिल हैं।
लेख यह भी रेखांकित करता है कि केवल अच्छे संबंधों से वैश्विक प्रभाव नहीं बनता। अमेरिका ने टैरिफ, प्रतिबंध, तकनीकी मानक और वित्तीय तंत्र जैसे कई साधनों का इस्तेमाल कर अपने हितों को साधा है। असली बढ़त उसी देश को मिलती है, जिसके पास ऐसी विशेषज्ञता हो जिसका विकल्प सीमित हो।
हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत को किसी की हूबहू नकल करने की जरूरत नहीं है। उसे अपनी परिस्थितियों और क्षमताओं के आधार पर उन क्षेत्रों को चुनना होगा, जिन्हें वह वैश्विक स्तर पर अपरिहार्य बना सके। आईटी, एआई, फिनटेक, बायोटेक जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा निर्माण में भी मजबूती जरूरी बताई गई है। एआई, क्वांटम सुरक्षा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
अंत में शिक्षा और शोध ढांचे में सुधार को अहम बताया गया है। रटने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर मौलिक शोध, नए विचारों को समर्थन और उच्च गुणवत्ता मानकों के जरिए ही ऐसे नवाचार संभव हैं, जो भारत को लंबे समय तक रणनीतिक बढ़त दिला सकें।

