
नई दिल्ली : भारत प्राकृतिक गैस से संचालित एक मौजूदा अमोनिया और यूरिया संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा आधारित संयंत्र में परिवर्तित करने जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद यह दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया संयंत्रों में से एक बन सकता है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 11 लाख टन होगी। सिंगापुर स्थित एशियन पावर (एपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना को एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड विकसित करेगी।
परियोजना को एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और जापान का वित्तीय समर्थन प्राप्त है। ये परियोजना एक्शन फॉर क्रिएटिंग एनर्जी सिक्योरिटी फॉर लॉन्ग-टर्म रेजिलिएंस (एसीसीईएल) के तहत दोनों पक्षों का पहला संयुक्त निवेश है। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के लिए वित्तपोषण में 10 करोड़ डॉलर का ऋण भी शामिल है, जो लीडिंग एशियाज प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड-2 के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।
भारत जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर चुका है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही लगभग 55.29 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ी गई। देश ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को पूरा करने में सौर और पवन ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है। यह परियोजना भारत के ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा और नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि ग्रीन अमोनिया को भविष्य के स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा भंडारण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।