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Lithium-Ion Cell, बैटरी विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना के लिए India को करना होगा 33,750 करोड़ रुपये का निवेश

February 21, 2023

Lithium-Ion Cell, बैटरी विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना के लिए India को करना होगा 33,750 करोड़ रुपये का निवेश

मुंबई: सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत 50 गीगावॉट के लिथियम आयन सेल और बैटरी विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को 33,750 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। एक अध्ययन में यह कहा गया। शोध संस्थान ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू)’ ने मंगलवार को एक स्वतंत्र अध्ययन जारी किया जिसमें कहा गया है कि 2030 तक अपने वाहन एवं ऊर्जा क्षेत्रों को कार्बन मुक्त बनाने के लिए देश को 903 गीगावॉट के ऊर्जा भडारण की आवश्यकता होगी। सीईईडब्ल्यू ने इस अध्ययन रिपोर्ट में कहा, ‘‘50 गीगावॉट के लिथियम-आयन सेल एवं बैटरी विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना के सरकार द्वारा तय पीएलआई लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को 33,750 करोड़ रुपये (लगभग 4.5 अरब डॉलर) तक का निवेश करना होगा।’’

शोध संस्थान के ‘‘भारत लिथियम-आयन बैटरी के विनिर्माण में स्वदेशीकरण कैसे करेगा’’ शीर्षक वाले अध्ययन में यह पता लगाने का प्रयास किया गया है कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यकताएं क्या होंगी। इसके अलावा इसमें घरेलू रणनीति की एक रूपरेखा भी पेश की गई है। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने घोषणा की थी कि देश में पहली बार लिथियम भडार मिला है जो जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित है और 59 लाख टन का है। बिजली से चलने वाले वाहनों में लगने वाली बैटरी में इस धातु का उपयोग किया जाता है। सीईईडब्ल्यू में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रमुख ऋषभ जैन ने कहा, ‘‘हरित भविष्य के लिए लिथियम भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितने कि आज तेल और गैस हैं। धातु का न केवल संरक्षण करना बल्कि देश में सेल एवं बैटरी विनिर्माण की प्रणाली स्थापित करना भी भारत के रणनीतिक हित में है।’’ उन्होंने कहा कि इसकी मदद से आगे जाकर भारत के आयात में कमी आएगी।

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