केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने सोमवार को भारत-ब्रिटेन ऑफशोर विंड टास्कफोर्स की शुरुआत की। इस मौके पर भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून भी मौजूद रहीं।
जोशी ने कहा कि यह टास्कफोर्स केवल औपचारिक मंच नहीं, बल्कि एक सक्रिय कार्यकारी तंत्र है, जिसे विजन 2035 और चौथे ऊर्जा संवाद के तहत गठित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा क्षेत्र को रणनीतिक दिशा और बेहतर समन्वय देना है।
उन्होंने बताया कि जहां यूनाइटेड किंगडम ने ऑफशोर विंड ऊर्जा और मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने में वैश्विक नेतृत्व दिखाया है, वहीं भारत के पास बड़ा बाजार, दीर्घकालिक मांग और तेजी से बढ़ता स्वच्छ ऊर्जा तंत्र है।
सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभ
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इकोसिस्टम और बाजार ढांचा – समुद्री क्षेत्र (सीबेड) लीजिंग व्यवस्था में सुधार और स्थिर राजस्व मॉडल तैयार करना।
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बुनियादी ढांचा और सप्लाई चेन – बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, स्थानीय निर्माण को बढ़ावा और विशेष जहाजों की उपलब्धता।
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वित्त और जोखिम प्रबंधन – मिश्रित वित्त मॉडल और दीर्घकालिक संस्थागत निवेश आकर्षित करना।
मंत्री ने बताया कि गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास अपतटीय पवन ऊर्जा के संभावित क्षेत्र चिन्हित किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के माध्यम से शुरुआती परियोजनाओं के लिए आवश्यक अध्ययन और सर्वेक्षण पूरे किए गए हैं।
सरकार ने प्रारंभिक परियोजनाओं के समर्थन के लिए 7,453 करोड़ रुपये (करीब 710 मिलियन पाउंड) की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना भी शुरू की है।
जोशी ने अपतटीय पवन ऊर्जा और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के बीच तालमेल पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत 279 रुपये प्रति किलोग्राम और ग्रीन अमोनिया 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है, जो अब तक के सबसे कम स्तरों में है।
उन्होंने कहा कि अपतटीय पवन ऊर्जा तटीय औद्योगिक क्षेत्रों और ग्रीन हाइड्रोजन क्लस्टरों को विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा दे सकती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 272 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जिसमें 141 गीगावाट से ज्यादा सौर और 55 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। चालू वित्त वर्ष में ही 35 गीगावाट से अधिक सौर और 4.61 गीगावाट पवन क्षमता जोड़ी गई है।
मंत्री ने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य और साझा प्रतिबद्धता के साथ अपतटीय पवन ऊर्जा भारत के स्वच्छ, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य का मजबूत स्तंभ बन सकती है और विजन 2035 के तहत भारत-ब्रिटेन सहयोग का अहम उदाहरण साबित होगी।

