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भारत-यूएस ट्रेड डील से टेक्सटाइल उद्योग को फायदा, कारोबार रहेगा स्थिर: एक्सपर्ट्स

India US textile trade deal

India US textile trade deal

यूएस के साथ ट्रेड डील में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 18 प्रतिशत तक कम होने से देश के टेक्सटाइल क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह बयान बुधवार को एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया।
दक्षिणी भारत मिल्स एसोसिएशन (एसआईएमए) के महासचिव सेल्वराज ने कहा कि ट्रेड डील में अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से कम होकर 18 प्रतिशत होना, टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए लाइफलाइन की तरह काम करेगा।
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “नई दर फिलहाल प्रतिस्पर्धी निर्यात करने वाले देशों में सबसे कम है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में इजाफा होगा”
इसके साथ, सेल्वराज ने कहा कि बीते कुछ महीनों में ब्रिटेन और फिर ईयू (यूरोपीय संघ) के साथ हुई ट्रेड डील और हाल ही में आए केंद्रीय बजट 2026-27 से इंडस्ट्री में आत्मविश्वास बढ़ा है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कृषि अर्थशास्त्री डॉ.आरएस घुमन ने कहा कि ट्रेड डील में टैरिफ का कम होकर 18 प्रतिशत हो जाने से दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे पूरे देश में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
डॉ. घुमन ने आगे कहा कि यह एक काफी अहम समझौता है। इसलिए आने वाले समय में हमें सामानों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा।
डॉ. घुमन ने बताया, भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में डेयरी और कृषि उत्पादों पर बाहर रखा है।
द कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (टीईएक्सपीआरओसीआईएल) के वाइस चेयरमैन रवि सैम ने आईएएनएस से कहा कि कुछ महीने पहले अमेरिका की ओर से भारतीय निर्यात पर जो टैरिफ लगाए गए थे, वह काफी अधिक थे। इसके कारण मैन्युफैक्चरर्स का मार्जिन काफी कम हो गया था। ऐसे में ट्रेड डील होने से इंडस्ट्री को काफी राहत मिलेगी, जिसमें टैरिफ पहले के 50 प्रतिशत से कम होकर 18 प्रतिशत हो गया है।
विदेशी व्यापार विशेषज्ञ और सीए संजय एम धारीवाल ने कहा कि इस ट्रेड डील से पूरी देश के उद्योगों को फायदा होगा। इसमें टैरिफ कम होने से टेक्सटाइल और कृषि उद्योगों को तो फायदा होगा, साथ ही बिना टैरिफ वाले सेक्टर जैसे आईटी और फार्मा को भी फायदा होगा, क्योंकि इससे व्यापार को स्थिर बनाने में मदद मिलेगी।
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