सरकार ने सोमवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुआ द्विपक्षीय समझौता वैश्विक व्यापार के लिहाज से भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस समझौते के जरिए भारतीय निर्यातकों को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिलेगी।
आधिकारिक बयान के मुताबिक यह समझौता काफी व्यापक है, जिसमें बड़ी संख्या में उत्पादों के लिए जीरो ड्यूटी पर निर्यात का रास्ता खुला है। इससे डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ेगा। साथ ही किसानों, एमएसएमई और घरेलू उद्योगों के हितों की भी सुरक्षा की गई है।
सरकार ने बताया कि वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका को निर्यात 86.35 अरब डॉलर रहा था। ऐसे में इस समझौते से टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी और कृषि जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के साथ-साथ फार्मा और टेक्नोलॉजी से जुड़ी इंडस्ट्री को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
समझौते के तहत अमेरिका ने 30.94 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। वहीं 10.03 अरब डॉलर के निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
बयान में कहा गया कि टेक्सटाइल और अपैरल उत्पादों पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से भारतीय निर्यातकों को 113 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं मशीनरी के निर्यात पर टैरिफ कम होने से 477 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार में नए अवसर खुलेंगे।
अमेरिका का फुटवियर बाजार करीब 42 अरब डॉलर का है। इस सेक्टर में भी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने से भारतीय निर्यातकों की स्थिति मजबूत होगी।
सरकार ने साफ किया कि इस ट्रेड डील में भारत ने डेयरी, मांस, मुर्गीपालन और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।
बयान के अनुसार, यह समझौता भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाएगा, क्योंकि अमेरिका ने चीन पर 37 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, जबकि मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, कंबोडिया और थाईलैंड पर 19-19 प्रतिशत का टैरिफ लगाया हुआ है।

