भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा सामने आ गया है और इसमें साफ दिख रहा है कि भारत को पड़ोसी और अन्य देशों की तुलना में बेहतर डील मिली है।
इस ट्रेड डील से भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा। साथ ही, देश के एमएसएमई, छोटे कारोबारियों और कुशल कर्मचारियों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बड़ा बाजार खुलेगा।
समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में और प्रतिस्पर्धात्मक बनेंगे और टैरिफ गैप भी कम होगा।
वर्तमान में अमेरिका ने कुछ देशों पर टैरिफ इस तरह लगाया हुआ है:
यूरोप: 15%
यूके: 10%
स्विट्जरलैंड: 15%
जापान: 15%
दक्षिण कोरिया: 15%
सबसे अधिक टैरिफ वाले देशों में:
ब्राजील: 50%
म्यांमार और लाओस: 40%
चीन: 37%
दक्षिण अफ्रीका: 30%
इस समझौते से सबसे बड़ा फायदा टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर गुड्स, केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री को होगा। भारत अब अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले मजबूत स्थिति में है। यह ढांचा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क हटाने का भी मार्ग खोलता है।
अमेरिकी टैरिफ में कमी से भारत की दर अधिकांश आसियान देशों से कम हो जाती है और चीन के मुकाबले भारत को बेहतर स्थिति मिलती है।
डीबीएस ग्रुप रिसर्च की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा,
“यह सफलता वास्तविक अर्थव्यवस्था, निर्यात, बाजार की भावनाओं और वित्तीय बाजारों के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक है, हालांकि विस्तृत जानकारी का इंतजार है।”
अब भारत चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसी अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अमेरिकी टैरिफ के मामले में सबसे कम दर वाले देशों में शामिल है।
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