भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर कई सेक्टरों में अनिश्चितता के बीच फार्मा सेक्टर पूरी तरह आश्वस्त दिखाई दे रहा है। भारत में कम लेबर कॉस्ट और सस्ती दवा निर्माण क्षमता ने इसे अमेरिकी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लायर बना दिया है। इस कारण अमेरिका की भारत पर निर्भरता पहले से मजबूत है, और इस डील के बाद और बढ़ने की संभावना है।
जोटा हेल्थकेयर के चेयरमैन केतन जोटा ने कहा कि अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा एफडीए-अप्रूव्ड प्लांट्स भारत में स्थित हैं। भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में जेनरिक दवाएं, लाइफ सेविंग और क्रॉनिक बीमारियों की दवाएं निर्यात की जाती हैं। केतन जोटा ने इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत बताया, क्योंकि अब तक टैरिफ मामलों में अमेरिका शायद ही कभी झुका हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संतुलित और लाभकारी समझौता संभव हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत से अमेरिका को मुख्य रूप से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, थायराइड जैसी लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियों की दवाएं निर्यात होती हैं, जिनकी अमेरिकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है।
इसके अलावा, यूरोपीय संघ के साथ हुए ट्रेड समझौते से भी भारत को फायदा होने वाला है। इस समझौते के तहत निर्यात पर ड्यूटी शून्य प्रतिशत कर दी गई है। इसका परिणाम यह होगा कि दवाओं का उत्पादन सस्ता होगा, टेक्नोलॉजी और व्यापार का ट्रांसफर भारत में होगा, और घरेलू मरीजों को भी किफायती दवाएं उपलब्ध होंगी।
इस तरह, भारत-यूएस ट्रेड डील और यूरोपीय संघ के समझौते भारतीय फार्मा सेक्टर की वैश्विक पकड़ को मजबूत करेंगे। इससे न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा, बल्कि घरेलू बाजार और मरीजों को भी सीधे लाभ मिलेगा।